राजातालाब। बभनियाव गांव में चल रहे उत्खनन कार्य के दौरान मंदिर के नीचे मंदिर का अवशेष मिला है। गोल वृत्ताकार ईट के घेरों तथा अन्य प्रमाण से यह मंदिर 17 सौ वर्ष पुराना बताया जा रहा है। प्रोफेसर ए के सिंह के अनुसार यह मंदिर लगभग तीसरी शताब्दी का है। वाराणसी का कर्दमेश्वर महादेव मंदिर दसवीं शताब्दी का है। उस समय लोग शिव की उपासना करते थे। बभनियाव में मिला मंदिर अब तक काशी का सबसे पुराना मंदिर होने का प्रमाण है।
शुक्रवार को शिवलिंग और अरघे के नीचे एक विशाल पत्थर का आधार शिला मिला था। शनिवार को जब चौकोर ईंटों के बने मंदिर के नीचे खुदाई की गई तो वहां वृत्ताकार ईटें मिलने लगीं। प्रोफेसर एके सिंह ने बताया कि यह निर्माण प्रारंभिक गुप्तकालीन मंदिर का है। यह मंदिर ईंटों से गोल वृत्ताकार घेरे में निर्मित थी। जो अवशेष प्राप्त हो रहे हैं उसमें ईंटों के गोल घेरे में दीवाल बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि गुप्त काल के शुरुआती काल में बने इस मंदिर के जीर्णोद्धार के समय वृत्ताकार ईंटों पर चौकोर मंदिर बना दिया होगा। वृत्ताकार ईटों के पास भी सीढि़यां मिलने की संभावना है, जो आधार के अगल-बगल में दिख रही है। काशी में यह इस तरह का पहला प्रमाण प्राप्त हुआ है, जिसमें मंदिर का जीर्णोद्धार कर मूर्ति को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए दोबारा मंदिर के ऊपर मंदिर बनाया गया है।
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काशी की ऐतिहासिकता प्राचीनता को सहेजना चुनौती
बभनियाव में उत्खनन के दौरान हुए गड्ढे को सुरक्षित रखना इतिहासविदों और स्थानीय ग्रामीणों के लिए चुनौती है। बारिश के कारण गड्ढे में पानी और कीचड़ भर जाएगा। बादलों को देखकर ग्रामीण और उत्खनन कार्य में लगे लोग काफी परेशान थे। गड्ढे के आसपास और ऊपर से छाजन की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण समस्या होगी।
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मुख्यमंत्री से मिलेंगे प्रधान और ग्रामीण
बभनियाव के ग्राम प्रधान रत्नेश कुमार सिंह ने शनिवार को कहा कि वे और आसपास के ग्रामीण गांव की ऐतिहासिकता को समझ चुके हैं। अवशेष को संरक्षित करने के लिए मुख्यमंत्री से शीघ्र मिलेंगे। पूर्व प्रधान दयाशंकर सिंह, स्वयंवर सिंह, सर्वेश, ढढोरपुर के पूर्व ग्राम प्रधान नीरज पांडेय, ओंकार सिंह ने कहा हमारे लिए गौरव की बात है।