काशी विश्वनाथ के दर्शन को आने वाले भक्त अब शिवलिंग का दूर से ही दर्शन कर पाएंगे। शिवलिंग को वह छू नहीं सकेंगे। नई व्यवस्था जल्द ही लागू हो जाएगी।
प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य एवं सूचना नवनीत सहगल ने बताया कि शिवलिंग का क्षरण रोकने के लिए बाबा को जल चढ़ाने की नई व्यवस्था बनाई जा रही है।
बुधवार को मंडलायुक्त कार्यालय में हुई मंदिर न्यास परिषद की 87वीं बैठक में सभी सदस्यों ने इस फैसले पर मुहर लगा दी है। बैठक में वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ।
प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने न्यास परिषद की बैठक के बाद पत्रकारों से बताया कि गर्भगृह के बाहर से जल डालने की व्यवस्था का खाका तैयार का निर्देश मुख्य कार्यपालक अधिकारी को दिया गया है।
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद भक्त शिवलिंग को छू नहीं सकेंगे। वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी मंदिर की तरह सामान्य दिनों में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में पुलिस के बजाय भूतपूर्व सैनिकों की तैनाती होगी।
इनमें महिला एवं पुरुष दोनों ही सुरक्षाकर्मी होंगे। आउटसोर्सिंग के आधार पर मंदिर की वर्दी में भूतपूर्व सैनिकों की तैनाती की जाएगी। यह प्रयोग के तौर पर छह माह के लिए लागू किया जाएगा।
पूरा मंदिर परिसर सीसीटीवी कैमरे की जद में होगा। तीन ताले वाले दानपात्र लगाए जाएंगे। गुप्तदान के लिए अलग से दानपात्र रखा जाएगा। मंदिर परिसर में विभिन्न प्रचलित भाषाओं में आवश्यक सूचनाएं प्रदर्शित की जाएंगी।
मंदिर के शिखर को गोल्ड प्लेटिंग कराने और एनामल पेंट हटाने के लिए पूर्व में बनाई कार्ययोजना को पूरा करने का निर्देश भी दिया गया।
बैठक में कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, न्यास के अध्यक्ष पं. अशोक द्विवेदी, डीएम राजमणि यादव, मुख्य कार्यपालक अधिकारी एमपी सिंह, अपर आयुक्त प्रशासन सहदेव, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी,
चंद्रमौलि उपाध्याय, प्रदीप कुमार बजाज, राजकृष्ण मालवीय, पं. देवी प्रसाद द्विवेदी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।