फाइलों में अटका ‘डमरू रेडियो’, भक्त कर रहे इंतजार
श्री काशी विश्वनाथ का रेडियो एफएम डमरू अभी तक नहीं बज सका है। मंदिर प्रशासन की ओर से शुरू होने वाले बाबा के रेडियो चैनल का प्रस्ताव फाइलों में ही लटका हुआ है। भक्त बाबा के डमरू का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। चार माह पहले एफएम को शुरू करने की तैयारी की गई थी।
चैनल के नाम से लेकर कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार कर ली गई। बाबा के रेडियो चैनल रेडियो डमरू के माध्यम से विविध आयोजनाें के साथ ही बाबा की आरती और धार्मिक अनुष्ठानों का प्रसारण की योजना बनाई गई थी।
द्वादश ज्योर्तिलिंगों में प्रमुख बाबा विश्वनाथ के रेडियो डमरू की योजना को मंदिर न्यास परिषद ने हरी झंडी दी। कार्यपरिषद से मुहर लगने के बाद इसको प्रसार भारती के पास एप्रूवल के लिए भेजा गया। चार माह बीतने के बाद सहमति नहीं मिलने के कारण यह काम लटका हुआ है।
रेडियो एफएम डमरू का उद्देश्य लोगों को आध्यात्मिक, सांप्रदायिक, सद्भाव, शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ही जागरूक करना था। कम्युनिटी रेडियो की तरह इसका संचालन किया जाना था। इंटरनेट के माध्यम से लोग देश-विदेश के किसी भी कोने से आनंद ले पाएंगे। सीईओ विशाल सिंह का कहना है कि रेडियो का प्रस्ताव प्रसार भारती को भेजा जा चुका है। वहां से सहमति मिलते ही इसको शुरू कर दिया जाएगा।
यह थी योजना
रेडियो डमरू का मूल रूप धार्मिक रखा गया था। इसका प्रसारण प्रारंभ में सामुदायिक रेडियो ब्रॉडकास्ट समय 18 घंटे का निर्धारित किया गया था। इसको प्रत्येक 3 घंटे के 6 शो में विभाजित किया जाएगा। इंटरनेट रेडियो 24 घंटे का होगा, जिसमें सामुदायिक रेडियो का 18 घंटे का शो और 6 घंटे का भक्ति संगीत होगा। जिनमें सभी 6 शो में शिव दर्शन, आध्यात्मिकता, शिक्षा जागरूकता, स्वास्थ्य जागरूकता, स्थानीय मुद्दे पर शो, सामाजिक उद्देश्य और हिंदू धर्म को शामिल किया गया है।
भक्तों को मिलेगा बाबा की आरती का आनंद
रेडियो डमरू मंदिर में होने वाली मंगला आरती, मध्याह्न आरती, सप्त ऋषि आरती, भोग शृंगार आरती और शयन आरती का भी आनंद ले पाएंगे। सुबह पंचांग तिथि, बाबा शृंगार और उसका महात्म्य बताया जाएगा। मंदिर में लगातार बजने वाले शिव के भजन भी सुन सकेंगे। रेडियो पर प्रसारित कार्यक्रम की लोकप्रियता को दिखते हुए उसे 24 घंटे प्रसारित किया जाना था।