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बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव आज, महंत के आवास पर पहुंची रजत प्रतिमा

Wed, 29 Jan 2020 11:01 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
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श्री काशी विश्वनाथ का तिलकोत्सव बृहस्पतिवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। बाबा की पंचबदन रजत प्रतिमा बुधवार की देर शाम महंत के अस्थायी आवास टेढ़ीनीम स्थित गेस्टहाउस में पहुंची। इस अवसर पर सांस्कृतिक आयोजन भी होंगे।

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काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी बाबा की रजत प्रतिमा पर गुलाल का तिलक लगाकर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा के परिणयोत्सव परंपरा का शुभारंभ करेंगे। इस बार बाबा की प्रतिमा का तिलक उत्सव अस्थाई महंत आवास टेढीनीम के गेस्ट हाउस में मनाया जायगा।

महंत डॉ. कुलपति तिवारी के अनुसार बाबा विश्वनाथ की रजत प्रतिमा का गुरूवार बंसत पंचमी के दिन सुबह मुहूर्त के अनुसार षोडशोपचार पुजन के बाद रुद्राभिषेक, दोपहर भोग पूजन के बाद नवीन परिधान धारण कराया जाएगा। सायकांल 6 बजे बाबा की प्रतिमा का तिलक कार्यक्रम होगा। शाम को गीतकार कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में शिवाजंलि का आयोजन होगा।

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बाबा आरती की फाइल फोटो

फाइलों में अटका ‘डमरू रेडियो’, भक्त कर रहे इंतजार

श्री काशी विश्वनाथ का रेडियो एफएम डमरू अभी तक नहीं बज सका है। मंदिर प्रशासन की ओर से शुरू होने वाले बाबा के रेडियो चैनल का प्रस्ताव फाइलों में ही लटका हुआ है। भक्त बाबा के डमरू का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। चार माह पहले एफएम को शुरू करने की तैयारी की गई थी।

चैनल के नाम से लेकर कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार कर ली गई। बाबा के रेडियो चैनल रेडियो डमरू के माध्यम से विविध आयोजनाें के साथ ही बाबा की आरती और धार्मिक अनुष्ठानों का प्रसारण की योजना बनाई गई थी।
 
द्वादश ज्योर्तिलिंगों में प्रमुख बाबा विश्वनाथ के रेडियो डमरू की योजना को मंदिर न्यास परिषद ने हरी झंडी दी। कार्यपरिषद से मुहर लगने के बाद इसको प्रसार भारती के पास एप्रूवल के लिए भेजा गया। चार माह बीतने के बाद सहमति नहीं मिलने के कारण यह काम लटका हुआ है।

रेडियो एफएम डमरू का उद्देश्य लोगों को आध्यात्मिक, सांप्रदायिक, सद्भाव, शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ही जागरूक करना था। कम्युनिटी रेडियो की तरह इसका संचालन किया जाना था। इंटरनेट के माध्यम से लोग देश-विदेश के किसी भी कोने से आनंद ले पाएंगे। सीईओ विशाल सिंह का कहना है कि रेडियो का प्रस्ताव प्रसार भारती को भेजा जा चुका है। वहां से सहमति मिलते ही इसको शुरू कर दिया जाएगा।

यह थी योजना

रेडियो डमरू का मूल रूप धार्मिक रखा गया था। इसका प्रसारण प्रारंभ में सामुदायिक रेडियो ब्रॉडकास्ट समय 18 घंटे का निर्धारित किया गया था। इसको प्रत्येक 3 घंटे के 6 शो में विभाजित किया जाएगा। इंटरनेट रेडियो 24 घंटे का होगा, जिसमें सामुदायिक रेडियो का 18 घंटे का शो और 6 घंटे का भक्ति संगीत होगा। जिनमें सभी 6 शो में शिव दर्शन, आध्यात्मिकता, शिक्षा जागरूकता, स्वास्थ्य जागरूकता, स्थानीय मुद्दे पर शो, सामाजिक उद्देश्य और हिंदू धर्म को शामिल किया गया है।

भक्तों को मिलेगा बाबा की आरती का आनंद

रेडियो डमरू मंदिर में होने वाली मंगला आरती, मध्याह्न आरती, सप्त ऋषि आरती, भोग शृंगार आरती और शयन आरती का भी आनंद ले पाएंगे। सुबह पंचांग तिथि, बाबा शृंगार और उसका महात्म्य बताया जाएगा। मंदिर में लगातार बजने वाले शिव के भजन भी सुन सकेंगे। रेडियो पर प्रसारित कार्यक्रम की लोकप्रियता को दिखते हुए उसे 24 घंटे प्रसारित किया जाना था।
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