मलबे से निकला गया बाबा विश्वनाथ का रजत सिंहासन
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काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास के मलबे में दबा बाबा का रजत सिंहासन शुक्रवार को क्षतिग्रस्त अवस्था में बाहर निकाला गया। 22 जनवरी की सुबह अचानक महंत आवास का दक्षिणी हिस्सा ढह गया था। भवन के उस हिस्से में रखे बाबा का रजत सिंहासन सहित पूजा और शृंगार में प्रयुक्त होने वाली रजत की कई अन्य वस्तुएं भी मलबे में दब गई थीं।
कई सौ किलोग्राम चांदी से निर्मित बाबा के रजत सिंहासन को काफी नुकसान पहुंचा है। सिंहासन के ऊपरी हिस्से में मढ़ी गई चांदी की नक्काशीदार परत उखड़ गई है और परत अब भी मलबे में ही दबी है। वहीं सिंहासन के निचले हिस्सा को भी नुकसान पहुंचा है। रजत सिंहासन को आकार देने में प्रयुक्त होने वाले चांदी के चारो खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गये हैं। बाबा के रजत छत्र, रजत झूले और रजत जड़ित पारंपरिक पालकी को भी मलबे में से निकाला गया।
मजदूरों द्वारा भवन के खतरनाक हिस्सों को तोड़ने का काम 23 जनवरी से शुरू हुआ जो अगले आठ दिनों तक चला। नौवें दिन गुरुवार को दोपहर बाद मलबा हटाने का काम शुरू हुआ। ऊपरी सतह से करीब दस फुट मलबा हटाने के बाद रजत सिंहासन के कुछ अंश सबसे पहले दिखाई दिए। इसकी सूचना मिलते ही मंदिर के महंत डा. कुलपति तिवारी मौके पर पहुंच गए।
मलबे से निकले रजत सिंहासन को टेढ़ीनीम स्थित अस्थाई महंत आवास पहुंचा दिया गया है। मलबे से घर-गृहस्थी की कुछ अन्य क्षतिग्रस्त सामग्री भी निकाली गई है। शाम होने के बाद मलबा हटाने का काम अगली सुबह तक के लिए रोक दिया गया।