वाराणसी। मथुरा में 11 मार्च को होने वाले पौराणिक रुद्रकुंड के लोकार्पण के लिए काशी से बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा की जगह दूसरा शिवलिंग बनवाकर ले जाया गया है। यह खुलासा विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने मथुरा के लिए विग्रह लेकर लोगों के निकलने से कुछ देर पहले ही किया।
उन्होंने मथुरा में रुद्रकुंड का जीर्णोद्धार कराने वाली संस्था दी ब्रज फाउंडेशन के पदाधिकारी विनीत नारायण से इसकी शिकायत भी की। आरोप लगाया कि चल प्रतिमा ले जाने के नाम पर कुछ लोगों ने ब्रज की संस्था से मिलकर लाखों रुपये का वारा-न्यारा भी किया है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए।
पौराणिक रुद्रकुंड के लोकार्पण से पहले बाबा की चल प्रतिमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। फिर भी शिवलिंग को बाबा के प्रतीक के तौर पर लेकर काशी से मथुरा के लिए धार्मिक यात्रा सोमवार की शाम को निकली और मंगलवार को पहुंच गई। मुंबई के उद्योग समूह अजय पिरामिल ग्रुप और दी ब्रज फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से इस तीर्थयात्रा की घोषणा काशी में बीती आठ फरवरी को की थी।
तब कहा गया था कि इसमें पांच सौ से अधिक तीर्थ यात्री बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा लेकर मथुरा जाएंगे। वहां भक्तों को मथुरा-वृंदावन के बीच के प्राचीन मंदिरों, गोवर्धन परिक्रमा और अन्य तीर्थ स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे। चल प्रतिमाओं के नाम पर बाबा का डोला काशी से मथुरा के लिए सोमवार को शाम पांच बजे कैंट स्टेशन से पटना-कोटा एक्सप्रेस से निकला।
इस यात्रा में महज 64 लोग शामिल हुए। बाबा का विग्रह लेकर मथुरा जाने वालों से 31-31 सौ रुपये शुल्क भी लिया गया। इस बीच विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने चल प्रतिमा के नाम पर इसे धोखाधड़ी करार देकर आयोजकों की मुश्किल बढ़ा दी। महंत ने फोन पर दी ब्रज फाउंडेशन के पदाधिकारी विनीत नारायण से इसकी शिकायत की।
कहा कि चल प्रतिमा के नाम पर जयपुर के किसी मूर्तिकार से शिवलिंग बनवाकर ले जाया गया है। इसके पीछे उन्होंने लाखों रुपये का वारा-न्यारा करने का आरोप भी लगाया। महंत ने बताया कि फाउंडेशन ने इस मामले की जांच कराने का भरोसा दिलाया है।