काशी के कोतवाल के जन्मोत्सव पर काशी में सोमवार को उत्सवी नजारा रहा। कहीं फूल बंगला सजाया गया तो कहीं गीत-संगीत की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु झूमे-थिरके। काल भैरव मंदिर में एक हजार, पांच सौ नोट की आकृति वाले केक काटे गए। अष्ठ भैरव की नगरी में अष्टमी पर दंडपाणि की सजी नयनाभिराम झांकियों के दर्शन के लिए देर रात तक तांता लगा रहा।
भैरव अष्टमी पर काशी के कोतवाल काल भैरव के दरबार को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया। शाम को श्रद्धालुओं ने पांच सौ, एक हजार के नोट की आकृति वाले केक काटे। केक का प्रसाद वितरित किय गया। इस दौरान झांकी दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही।रेशम कटरा स्थित कोडमदेश्वर भैरव का भी फूलों से मोहक शृंगार किया गया। हवन, पूजन के बाद आरती उतारी गई। इस मौके पर मुकुंदलाल टंडन, श्याम जी केशरी, आत्मा केशरी, अनिल गुजराती, छोनालाल, नंदलाल कसेरा, आदित्य गोयनका समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
उधर, शीतला घाट स्थित आदि बुढ़िया की गुफा में भी काल भैरव का शृंगार किया गया। महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय ने आरती उतारी। बटुक भैरव मंदिर में भी शृंगार झांकी के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। कज्जाकपुरा स्थित अनादिकालेश्वर कपाल भैरव के बाल रूप का शृंगार किया गया। काशी में अष्ट भैरव के स्वरूपों में असितांग भैरव, चंड भैरव, रूरू भैरव, क्रोध भैरव, उन्मत्त भैरव, कपाल भैरव, भीषण भैरव, संहार भैरव का भी शृंगार किया गया।