खुद को मंदिर का कर्मचारी और सेवादार बताकर बाबा विश्वनाथ के भक्तों को घर बैठे प्रसाद भेजने और पूजा कराने का गोरखधंधा सामने आया है। ये लोग आश्रमों के नाम पर भी इस धंधे को चला रहे हैं और लाखों रुपये का वारा-न्यारा किया जा रहा है। लखनऊ के एक भक्त के पते पर घर बैठे प्रसाद भेजने और एक लाख रुपये में शंकराचार्य से विश्वनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक कराने की बुकिंग के बाद इस नेटवर्क की शिकायत अफसरों से की गई। प्रभारी मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी ने बाबा के प्रसाद के नाम पर हो रहे इस धंधे की जांच शुरू कर दी है। मंदिर प्रशासन ने इस धंधे से जुड़े तीन सदस्यों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाने की संस्तुति देर शाम एसएसपी आकाश कुलहरि को पत्र भेजकर की। दो मोबाइल नंबर इससे पहले पुलिस को जांच के लिए दिए जा चुके हैं। पता चला है कि इस तरह की ठगी सैकड़ों भक्तों से की जा चुकी है।
घर बैठे बाबा विश्वनाथ का प्रसाद कोरियर से भेजने के धंधे में शामिल युवक-युवतियों के नाम और मोबाइल नंबर पुलिस को दिए गए हैं, ताकि इस गोरखधंधे की तह तक पहुंचा जा सके। हाल ही में यह मामला तब सामने आया जब लखनऊ के बालागंज निवासी ज्ञानप्रकाश के पास एक महिला ने फोन कर विश्वनाथ मंदिर में शंकराचार्य की ओर से कराए जाने वाले रुद्राभिषेक में उनसे शामिल होने की गुजारिश की। इसके लिए एडवांस में रकम भेजने के लिए भी कहा। ज्ञान प्रकाश ने जब मंदिर से जुड़े लोगों से संपर्क कर शंकराचार्य की ओर से कराई जाने वाली पूजा के बारे में पता किया तब जानकारी मिली कि ऐसा कोई अनुष्ठान यहां नहीं होने वाला है। इसके बाद ज्ञान प्रकाश ने इसकी जानकारी अपने कुछ और मित्रों को दी। फिर, वाराणसी निवासी अजय शर्मा के फोन पर खुद को विश्वनाथ मंदिर की सेवादार बताते हुए संध्या मिश्रा नामक किसी महिला ने बाबा विश्वनाथ के प्रसाद की बुकिंग कराई।
अजय का मकान लखनऊ के गोमती नगर स्थित विराट खंड में भी है। 22 सौ रुपये जमा करने के बाद उनके लखनऊ के पते पर कोरियर से प्रसाद पहुंचा, तब उस पर भेजने वाले का पता 59/143 मालती सदन हुकुलगंज, पांडेयपुर लिखा था। बाबा के प्रसाद का पैकेट विश्वनाथ मंदिर के बजाय दूसरे पते से भेजने पर अजय को शक हुआ तब उन्होंने संबंधित मोबाइल नंबर पर फोन कर इसकी सचाई जाननी चाही। इस पर उस महिला ने उनसे कहा कि वह एक आश्रम से भी जुड़ी हैं। 1.01 लाख रुपये में उनका आश्रम विश्वनाथ मंदिर में 31 आचार्यो से रुद्राभिषेक भी करवाता है और यह कार्य 12 वर्षों से चल रहा है। उनकी बात से संतुष्ट न होने पर अजय ने प्रसाद लेने से इनकार कर दिया और इसकी शिकायत मंदिर प्रशासन से की।
प्रभारी सीईओ ने बताया कि अजय से जिन तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों से प्रसाद की बुकिंग कराई गई थी। उन नंबरों को एसएसपी के पास भेजा जा रहा है। बातचीत के रिकार्ड भी मंदिर प्रशासन के हाथ लगे हैं। अफसरों का कहना है कि बाबा के प्रसाद के नाम पर धंधा चलाने वालों का जल्द ही खुलासा होने की उम्मीद है। इससे पहले भी दूसरे शहरों से इस तरह की शिकायत भक्तों ने की थी। तब एसपी ज्ञानवापी एके पांडेय को दो मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाकर ट्रेस करने के लिए दिए गए थे।