सिंहासन को दशाश्वमेध के कारीगर अशोक कसेरा ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिल कर तैयार किया है। खास बात यह है कि शशिधर प्रसाद और अशोक कसेरा दोनों ने ही बाबा का सिंहासन तैयार करने के एवज में कोई मेहनताना नहीं लिया है। इन दोनों का कहना है कि बाबा की सेवा का अवसर जीवन में पहली बार मिला है। यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।
‘शिवांजलि’ के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने बताया कि बाबा की पालकी में लगने वाले नए सिंहासन के लिए लखनऊ के शिवम मिश्रा के माध्यम से दिल्ली व कश्मीर के भक्तों ने सिंहासन के लिए काष्ठ व रजत की व्यवस्था की है। ‘शिवांजलि’ के सदस्यों ने शनिवार को बाजे-गाजे के साथ नए सिंहासन को टेढ़ी नीम महंत आवास में डॉ. कुलपति तिवारी को सौंप दिया।
रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ हाजी गयास के हाथों तैयार शाही पगड़ी पहनकर तैयार होंगे। श्री काशी विश्वनाथ की शाही पगड़ी ढाई सौ साल से हाजी गयास का परिवार बनाता आ रहा है। हर साल की तरह मखमल के साथ जरी, बूटा, नगीना, फलंगी एवं सुरखाब के पंख से बाबा की पगड़ी बनकर तैयार है। रविवार को महंत आवास पर विधि विधान से पगड़ी की पूजा की जाएगी।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि हाजी गयास के परदादा जब लखनऊ से आए थे तो यहीं के होकर रह गए। उन्होंने पहली बार बाबा की पगड़ी बनाने की पेशकश की तो उसको स्वीकार कर लिया गया था। वहां से चली आ रही सद्भाव की यह परंपरा आज तक कायम है।