फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आजमगढ़: दो शिक्षकों की प्रवक्ता पद पर पदोन्नति निरस्त करने के आदेश, जांच में मिली अनियमितता; जानें पूरा मामला

Thu, 17 Sep 2026 05:56 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।

सार

दो शिक्षकों की प्रवक्ता पद पर पदोन्नति निरस्त करने के आदेश दिए गए हैं। जांच में दोनों की पदोन्नति में पांच वर्ष की सेवा पूरी न होने और निर्धारित शैक्षिक अर्हता समेत कई बिंदुओं पर अनियमितता मिली। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों ने पदोन्नति निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की है। मामले में विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
विज्ञापन
दो शिक्षकों की प्रवक्ता पद पर पदोन्नति निरस्त करने के आदेश। - फोटो : Istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आजमगढ़ जिले के दो अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों विंध्येश्वरी इंटर कॉलेज तुलसीनगर के सहायक अध्यापक राजकुमार की इतिहास प्रवक्ता और गयादीन जायसवाल इंटर कॉलेज खुरासों के सहायक अध्यापक सुनील कुमार की गणित प्रवक्ता पद पर पदोन्नति को नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया है।

विज्ञापन


संयुक्त शिक्षा निदेशक राजेश कुमार आर्य ने बताया कि दोनों पदोन्नतियां निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच पत्र के अनुसार, विंध्येश्वरी इंटर कॉलेज तुलसीनगर में इतिहास प्रवक्ता हौसिला प्रसाद वर्मा के 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त होने से पद मौलिक रूप से रिक्त हुआ था।

राजकुमार ने आठ फरवरी 2020 को विद्यालय में कला अध्यापक के पद पर कार्यभार ग्रहण किया था। जांच में पाया गया कि प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत संबंधित शिक्षक का एलटी/सीटी श्रेणी में होना और रिक्ति की तिथि पर न्यूनतम पांच वर्ष की लगातार मौलिक सेवा समेत निर्धारित अर्हता पूरी करना जरूरी है।

जांच में राजकुमार की शैक्षिक योग्यता में बीए चित्रकला, एमए चित्रकला और 2024 में इतिहास विषय से एमए दर्ज पाया गया। जांच अधिकारी के अनुसार वह प्रशिक्षित स्नातक यानी बीएड उत्तीर्ण नहीं हैं।

इसी आधार पर आठ अगस्त 2026 को इतिहास प्रवक्ता पद पर की गई उनकी पदोन्नति को नियम विरुद्ध माना। गयादीन जायसवाल इंटर कॉलेज खुरासों में गणित प्रवक्ता धनंजय पांडेय के आठ जुलाई 2025 को गोरखपुर स्थानांतरण के बाद पद रिक्त हुआ था।

सुनील कुमार ने विद्यालय में एक सितंबर 2020 को कार्यभार ग्रहण किया था। जांच में कहा गया कि पद रिक्त होने की तिथि तक उनकी सहायता प्राप्त विद्यालय में पांच वर्ष की लगातार मौलिक सेवा पूरी नहीं हुई थी।

सुनील कुमार ने एक वित्तविहीन विद्यालय में एक अप्रैल 2018 से 29 अगस्त 2020 तक अध्यापन का अनुभव प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया था। जांच में इस सेवा को पदोन्नति के लिए मान्य सेवा नहीं माना गया।

रिपोर्ट में कहा गया कि यह सेवा उनके सेवा अभिलेखों में दर्ज नहीं थी और सक्षम स्तर से प्रतिहस्ताक्षरित/सत्यापित भी नहीं थी। जांच पत्र में वित्तविहीन विद्यालय की सेवा को अंशकालिक सेवा की श्रेणी में बताते हुए उसे सहायता प्राप्त विद्यालय की मौलिक सेवा के साथ जोड़ना नियमसंगत नहीं माना गया।
विज्ञापन

जांच में यह भी सामने आया कि गणित प्रवक्ता का रिक्त पद सीधी भर्ती के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को अधियाचित किए जाने की जानकारी विद्यालय प्रबंधन ने दी थी।

इसके बावजूद चयन आयोग और निदेशालय से अनापत्ति लिए बिना उसी पद को पदोन्नति से भरने को भी अनियमित माना गया। जांच पत्र में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में सीधी भर्ती से चयनित अभ्यर्थी के आने पर एक ही पद को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है।

जेडी राजेश कुमार आर्य ने बताया कि जांच के बाद संबंधित अधिकारियों को दोनों मामलों में शासनादेश 28 अप्रैल 2025 और इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 में निर्धारित व्यवस्था के तहत संबंधित पक्षों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर देने के बाद पदोन्नति निरस्त करने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें