महासचिव ने बताया कि गर्भ गृह के गेट पर हनुमान और गणपति की दो प्रतिमाओं को लगाया जाना है। दरवाजे के दाएं और बाएं खंभों की दीवार में ताखे(गऊंखा) बनाए जाएंगे। मूर्तियों को रखने के लिए ताखे की गहराई और चौड़ाई पर बैठक में मंथन हुआ। बनारस और लखनऊ विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स के प्रोफेसर आए थे। उन्होंने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। चंपत राय ने कहा कि हजारों की संख्या में मूर्तियों को बनाया जाना है। खंभों के अंदर लगने वाली मूर्तियों पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें प्रोफेसर की आगे भी मदद ली जाएगी।
महासचिव ने बताया कि मंदिर निर्माण में पत्थर व तांबे का प्रयोग किया जा रहा है। पत्थरों को जोड़ने के लिए जो कुंजी है वह भी पत्थर और तांबे की है। कर्नाटक, तेलगांना, राजस्थान के संगमरमर का प्रयोग किया जा रहा है। मंदिर परिसर में रामचरितमानस से जुड़ी महान विभूतियों की मूर्ति भी लगाई जाएगी । अन्नपूर्णा मंदिर के पास ही भोजनालय बनाया जाएगा। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय मंत्री पंकज, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारिणी सदस्य गोपाल मौजूद रहे।