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UP: अविमुक्तेश्वरानंद बोले- पुलिस जेल में ले जाकर जहर की सुई भी लगा सकती है, मामले को एपस्टीन फाइल से जोड़ा

Fri, 27 Feb 2026 05:49 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने श्रीविद्या मठ पर पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइल में देश के कई बड़े लोगों के नाम शामिल हैं, उसे दबाने के लिए ही मेरी बदनामी कर जनता को उलझाया जा रहा है।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Varanasi News: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन पर लगाए जा रहे आरोपों को झूठा और निराधार बताया है। उन्होंने अपनी हत्या की आशंका भी जताई। बृहस्पतिवार को वह केदार घाट स्थित मठ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि आश्रम के लोगों को आशंका है कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल ले जा सकती है, जहां उन्हें जहर की सुई लगाकर मार भी दिया जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि वह स्वयं अग्रिम जमानत दाखिल करने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन पीठ से जुड़े लोगों की भावनाओं के आधार पर यह निर्णय लिया गया। उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति झूठी कहानी गढ़कर लोगों के सामने रख देता है और उसी आधार पर पूरा घटनाक्रम चलने लगता है।

शंकराचार्य ने कहा कि जांच टीम अपना काम कर रही है, लेकिन आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा प्रेस वार्ता कर जांच संबंधी रिपोर्ट मीडिया के सामने प्रस्तुत की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच टीम की रिपोर्ट एक हिस्ट्रीशीटर सार्वजनिक कर रहा है तो पुलिस क्या कर रही है।

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उन्होंने कहा कि कानूनन पॉक्सो एक्ट से संबंधित रिपोर्ट सामान्यतः सार्वजनिक नहीं की जाती। यदि कोई जानकारी साझा की भी जाती है तो वह पुलिस विभाग की ओर से होनी चाहिए। उनका कहना था कि ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने शिकायतकर्ता को ही अपना स्थायी प्रवक्ता बना लिया है। मठ से जुड़ी ‘शीश महल’ जैसी चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इस समय जिसे जो कहना है, वह कह रहा है। उन्होंने कहा कि किसी कक्ष में शीशा लगा होना बुराई नहीं है। यदि कमरा पारदर्शी है तो बाहर का व्यक्ति अंदर देख सकता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
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पांच मंजिला भवन के संबंध में उन्होंने कहा कि यह कोई छिपाने योग्य वस्तु नहीं है, जिसे जेब में रखकर छिपाया जा सके। उनके अनुसार आश्रम में कुछ भी छिपा हुआ नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई आश्रम को ऊपर तक देखना चाहता है तो उसे बिना कैमरे के पूरा परिसर देखने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, यहां छात्र पढ़ते और निवास करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कैमरे के साथ प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती। 

उन्होंने कहा कि भारत के कानून, न्यायपालिका और सरकारों का कितना बड़ा दुरुपयोग हो सकता है, यह एक दर्शक के रूप में देखने को मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एपस्टीन फाइल में देश के कई बड़े लोगों के नाम शामिल हैं और उसे दबाने के लिए ही उनकी बदनामी कर जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है।
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