दुनिया को जलवायु परिवर्तन की चिंता और चुनौतियों से निजात दिलाने के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय भी ठोस पहल की तैयारी में है। जल्द ही विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन केंद्र की स्थापना की जाएगी।
यहां बीएचयू के विभिन्न संस्थानों और संकायों के विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन पर अध्ययन करेंगे। सभी विशेषज्ञ मिलकर इस वैश्विक समस्या को समझने के साथ ही उसके समाधान की राह सुझाएंगे।
बीएचयू शताब्दी वर्ष के तहत साकार होने वाली इस परियोजना की जानकारी गुरुवार को कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने दी। अगले सत्र से जलवायु परिवर्तन को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करने की तैयारी भी बीएचयू ने की है।
कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि जलवायु परिवर्तन केंद्र की स्थापना के लिए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय सहयोग करेगा। केंद्र की स्थापना का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है।
जलवायु परिवर्तन पर अध्ययन और शोध में मेडिकल, विज्ञान, कृषि, कला, सामाजिक विज्ञान के साथ ही आईआईटी की भी भागीदारी होगी। केंद्रीय कार्यालय में पत्रकारों से मुखातिब कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय अपने सौ साल पूरे कर रहा है।
शताब्दी वर्ष पर कई योजनाएं साकार रूप लेंगी, इसमें भारत अध्ययन केंद्र, नदी विकास एवं जल संसाधन प्रबंधन मालवीय शोध केंद्र के साथ ही सोलर एनर्जी पार्क और जलवायु परिवर्तन केंद्र शामिल हैं।