यह बदलाव भारतीय स्टांप अधिनियम के तहत हुआ है। राज्यमंत्री ने बताया कि रजिस्ट्री कराने के दौरान अब ज्यादातर ई-स्टांप का प्रयोग हो रहा है। ई-स्टांप कोई पेपर पर नहीं छपता, बल्कि शुल्क जमा करने के बाद उतनी धनराशि की मोहर लगा दी जाती है। इससे पेपर बचता है। स्टांप प्रिंटिंग का खर्च भी बच जाता है।
मंत्री ने कहा कि प्रति वर्ष 32 लाख लोग रजिस्ट्री करा रहे हैं। यह आंकड़ा दोगुने से भी अधिक है। साल 2017 में जहां प्रति वर्ष 16 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था, वो अब 2023 में 26 लाख करोड़ रुपये का हो रहा है।