प्रशासनिक भवन के द्वार पर धरना-प्रदर्शन करते कर्मचारी।
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बता दें कि विद्यापीठ में 45 कर्मचारियों का समायोजन वर्ष 2005 के बाद हुआ था, जबकि अस्थायी तौर पर उनकी नियुक्ति दशकों पहले हुई थी। वहीं वर्ष 2005 के बाद समायोजन होने के कारण इन कर्मचारियों को पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं कर्मचारी नियुक्ति तिथि सेवा से जोडने की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें भी पेंशन का लाभ मिल सके।
रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने एक समिति का गठन किया था। पिछले दिनों समिति ने अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंप दी थी। कर्मचारी रिपोर्ट को सार्वजानिक करने की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कमेटी की रिपोर्ट पक्ष में या विपक्ष में हो उसे लागू किया जाए। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन कर्मचारियों के मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। कुलसचिव डॉ एस एल मौर्य ने बताया कि कर्मचारियों द्वारा इस तरह के व्यवहार की जानकारी नहीं है।