भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का काशी से गहरा लगाव था। काशी की उनकी हर यात्रा से ढेर सारे संस्मरण जुड़े हैं। चुनावी सभा के दौरान भी वह किसी कार्यकर्ता को भूलते नहीं थे, चाहे वह छोटा हो या बड़ा।
जनसंघ के दौर में आम चुनाव में घंटाघर में अटलजी की चुनावी सभा रख दी। तैयारी बैठक के दौरान अटल जी की सभा में वंदेमातरम गान का दायित्व पद्मपति शर्मा को सौंपा गया था। इस दौरान अटल बिहारी बाजपेयी ने कार्यकर्ताओं की सुध ली। वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा बताते हैं कि वंदेमातरम गान के दौरान बनारस से सिंगल रीड का हारमोनियम हमारे साथ गया था। वंदेमातरम गीत का उस पर रियाज मेरे लिए बवाल ए जान बन गया। अटल जी की सभा में जाने से रोकने के लिए मेरे मामाजी ने जबरदस्ती मेरा मुंडन करा दिया। बावजूद इसके अटलजी के आगमन के साथ ही मैं भी सभा स्थल पहुंच गया था। मैंने वंदेमातरम गान आंसूओं के साथ जब समाप्त किया तब अटलजी मेरा चेहरा देख कर परेशान हो उठे।
अटलजी पूछ बैठे, क्या हुआ बेटे जी आपको। मेरे सब्र का बांध टूट गया। मैंने उन्हें सारी बातें बताईं। यह सुन कर तमतमाए अटलजी ने छोटे मामाजी को वहीं जम कर खरी-खरी सुनाई और उधर बड़े मामा अपनी मंडली के साथ पतली गली से निकल गए। अटलजी ने मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, आप मेरे साथ ही दो दिन रहेंगे। ये दो दिन मेरी अनमोल धरोहर ही हैं। सोचता हूं कि जो हुआ, अच्छा ही हुआ। ऐसे सानिध्य के लिए एक क्या सौ बार भी सर मुंडाना कम होगा। इस बात को पूरे पचास बरस से ज्यादा बीत गए। उस चुनाव में जनसंघ का प्रत्याशी 145 वोट से कांग्रेस के हाथों हार गया। तब कौन जानता था कि एक दिन वह जग जीत लेंगे अपनी वाणी और सत्कर्मों से। बलरामपुर में संघ के लगे शिविर में अटलजी ने आते ही मेरे बारे में पूछा, तब दसवीं की मैं गोंडा में परीक्षा दे रहा था। बाद में 1980 में दूसरी बार सामना हुआ मेरा अटलजी से जब वह मध्यावधि चुनाव के दौरान काशी आए थे।