वाराणसी। नक्षत्रों का राजा पुष्य है। पुष्य नक्षत्र समृद्धि देनेवाला और संपत्ति व आय में बढ़ोतरी करता है। पुष्य नक्षत्र के संयोग से कार्यसिद्धि योग भी बनता है। दीपावली से सात दिन पहले सात नवंबर को पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य के ए दुबे पद्मेश का कहना है कि 7 नवंबर शनिवार को पुष्य नक्षत्र प्रात: 8:05 मिनट से और दूसरे दिन प्रात: 6:13 बजे तक है। रविवार और शनिवार को जब पुष्य नक्षत्र होता है तो पुष्यामृत योग बनता है। इस योग में यदि मूल्यवान वस्तु, आभूषण, वाहन, निजी उपयोगी वस्तुओं तथा चल-अचल संपत्ति की खरीदारी करते हैं तो यह फलदायी होती है।
ज्योतिषाचार्य स्वाती सक्सेना ने बताया कि शनि पुष्य और रवि-पुष्य योग सबसे शुभ माने जाते हैं। सात और आठ नवंबर को पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इसको धनतेरस से भी शुभ दिन माना जाता है। इस दिन दिव्य योग में की गई खरीदारी अक्षय होती है। परंपरागत रूप में खरीदारी के लिहाज से धनतेरस को सबसे शुभ माना जाता है। पुष्य नक्षत्र के इस सर्वसिद्धि योग में स्वर्ण आभूषण, खाता बही के साथ नवीन वस्तुओं की खरीदारी शुभ, उन्नति प्रदायक और स्थायी फल देने वाली होती है। इस महत्वपूर्ण नक्षत्र में लोग खरीदारी का लाभ शनिवार को सुबह 8 बजे से लेकर रविवार तक दोपहर तक ले सकते हैं।
इस शुभ और दिव्य मुहूर्त पर खरीदारी के लाभ
1- इस दिन स्वर्ण आभूषण खरीदने से समृद्धि बनी रहती है
2-आज के दिन नई जमीन, मकान खरीदना, वाहन खरीदना भी जीवन में स्थायित्व प्रदान करता है।
3-आज के शुभ योग में मोती शंख या दक्षिणावर्ती शंख और श्री यंत्र का अपनी दुकान या प्रतिष्ठान में स्थापित करने से व्यापार में अप्रत्यक्ष उन्नति और लाभ देता है।
4-आज के दिन वस्त्रों बर्तनों और साजसज्जा का सामान खरीदने से जीवन में ऐश्वर्य और प्रगति का अनूठा संबंध चिरकाल तक विद्यमान रहता है।