चार महीने की लंबी मशक्कत के बाद अस्सी घाट की सफाई की मुहिम अब अंतिम दौर में है। आखिरी प्लेटफार्म से सिल्ट हफ्ते भर में हटा ली जाएगी। इसके लिए पानी में पांच फीट नीचे से मिट्टी निकाली जा रही है, ताकि घाट से नौकायन में पर्यटकों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। फिलहाल नावें अब इस घाट पर लगने लगी हैं लेकिन इसके दक्षिणी हिस्से वाले घाट पर सौ मीटर से अधिक एरिया में सिल्ट के वर्षों पुराने ढेर अब भी मुंह चिढ़ा रहे हैं।
उत्तरी तरफ गंगा महल और रीवा घाट को गोद लेने वाली समितियों ने भी काम शुरू नहीं किया है। ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी का स्वच्छता अभियान काशी में सिर्फ अस्सी घाट तक सिमटा नजर आने लगा है। आठ नवंबर, 2014 को पीएम ने फावड़ा चलाकर इस घाट से स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी।
काशी में स्वच्छता अभियान सही मायने में अभी तक अस्सी घाट से आगे नहीं बढ़ सका है।
कुछ घाटों पर झाड़ू लगवाने, डस्टबिन रखवाने और गंगा में विसर्जित फूलमाला उठवाने को छोड़ दिया जाए तो वर्षों से पड़ी बाढ़ की सिल्ट अभी सिर्फ अस्सी से ही हटाई जा रही है। सुलभ इंटरनेशनल के राष्ट्रीय सलाहकार बीएन चतुर्वेदी के मुताबिक हफ्ते भर में अस्सी घाट से मिट्टी पूरी तरह से हटा ली जाएगी। अस्सी घाट के दोनों तरफ पड़ी सिल्ट के की सफाई के बारे पूछने पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई। अस्सी से संत रविदास घाट के बीच के हिस्से को सफाई के लिए गायत्री परिवार ने गोद लिया है लेकिन अभी तक इस संस्था की ओर से काम शुरू ही नहीं कराया जा सका है।
तुलसी घाट से लगे रीवा घाट की सफाई के लिए पंजाब नेशनल बैंक को जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन वहां भी सिल्ट जस की तस पड़ी है। तीर्थपुरोहित बलराम मिश्र का कहना है कि सिर्फ अस्सी घाट की सफाई से स्वच्छता अभियान की कामयाबी का डंका नहीं पीटना चाहिए। दूसरे घाटों की हालत वैसी ही है जैसे पहले थी। भदैनी के पार्षद गोविंद शर्मा का कहना है कि जब तक सभी घाटों से सिल्ट नहीं हटेगी, तब तक स्वच्छता अभियान की कामयाबी साबित नहीं हो सकती।