समयसीमा बढ़ाने का अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से विरोध किया गया था। आपत्ति दाखिल करके अलग-अलग तर्क भी दिए थे, लेकिन अदालत ने एएसआई की अर्जी को स्वीकार कर ली।
तीन अधिवक्ताओं ने रखा मसाजिद कमेटी का पक्ष
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से मुमताज अहमद, एखलाक अहमद और रईस अहमद ने सिलसिलेवार हिंदू पक्ष के आवेदन पत्रों के विरोध में पक्ष रखा।एएसआई की ओर से भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल अमित श्रीवास्तव व उनके सहयोगी शंभू शरण सिंह, राज्य सरकार की तरफ से विशेष अधिवक्ता राजेश मिश्र और पुलिस-प्रशासन की तरफ से डीजीसी सिविल महेंद्र पांडेय सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहे
जिला जज की अदालत के आदेश से ज्ञानवापी परिसर स्थित सील वजूखाने को छोड़कर अन्य हिस्से का सर्वे एएसआई ने बीते 24 जुलाई को शुरू किया था। सर्वे शुरू होने के पांच घंटे बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश से काम पर रोक लग गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से चार अगस्त को दोबारा सर्वे शुरू हुआ।
पांच अगस्त को जिला जज की अदालत ने आदेश दिया कि एएसआई सर्वे रिपोर्ट दो सितंबर तक पेश करे। दो सितंबर को अदालत में एएसआई की ओर से प्रार्थना पत्र दिया गया कि सर्वे के लिए आठ हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया जाए। एएसआई के प्रार्थना पत्र चार सितंबर को अदालत ने सुनवाई के लिए शुक्रवार की तिथि नियत की।