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यूपी: ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर एआरवी का टोटा, मरीजों की बढ़ी सांसत

Sat, 19 Sep 2020 05:36 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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कोरोना काल में सामान्य बीमारियों के मरीजों का बेहतर इलाज मिलने का दावा तो किया जा रहा है लेकिन लोगों को अभी भी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालत है कि इन दिनों जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रेबीज इंजेक्शन की कमी की वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। 

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कुत्ता या बंदर काटने के बाद लोग खुद या बच्चों को लेकर स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंच रहे हैं तो उन्हें जिला और मंडलीय अस्पताल रेफर किया जा रहा है। इन अस्पतालों में तो एंटी रैबीज वैक्सीन लग रहा है लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों पर संकट है।


चोलापुर, कछवा, मिर्जामुराद सहित कई जगहों पर वैक्सीन नहीं है तो कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर अगर वैक्सीन है भी तो बस तीन-चार और इसमें भी सभी को लाभ नहीं मिल पा रहा है और मजबूरी में जिला-मंडलीय अस्पताल आना पड़ रहा है। जल्दी इन स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन नहीं आई तो लोगों की समस्याएं बढ़ जाएगी।

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विभाग की ओर से कारपोरेशन को पत्र भेजकर एआरवी की मांग की गई है। एक दो दिन में वैक्सीन आने के बाद सभी स्वास्थ्य केंद्रों को भिजवाया जाएगा। फिलहाल जिला-मंडलीय अस्पतालों में पर्याप्त वैक्सीन है और आने वाले सभी लोगों को लगाया जा रहा है। -डॉक्टर वीबी सिंह, सीएमओ 

मंडलीय अस्पताल-रामनगर अस्पताल पर दबाव  
स्वास्थ्य केंद्रों पर एआरवी की कमी की वजह से मंडलीय अस्पताल-रामनगर अस्पताल पर दबाव बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आठ ब्लाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ ही मंडलीय अस्पताल, दीनदयाल अस्पताल, रामनगर अस्पताल में भी टीका लगने की व्यवस्था है। दीनदयाल अस्पताल कोविड अस्पताल बना है। इसकी वजह से मंडलीय अस्पताल और रामनगर में ही सबसे ज्यादा दबाव है।
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