भ्रष्टाचार के आरोप में चंदौली के निलंबित एआरटीओ आरएस यादव को शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा में मिर्जापुर जेल से लाकर प्रभारी विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) लोकेश राय की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए आरएस यादव की न्यायिक हिरासत की अवधि 14 दिन के लिए बढ़ा दी।
साथ ही अगली पेशी के लिए एक दिसंबर की तारीख तय कर दी। सुनवाई के बाद पुलिस आरएस यादव को लेकर जिला कारागार, मिर्जापुर लौट गई। वहीं, केस डायरी से खुलासा हुआ है कि भ्रष्टाचार के मुकदमे से संबंधित जो आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया है, उसमें छावनी क्षेत्र स्थित होटल वेस्ट इन, गोरखपुर के मॉल, दिल्ली के फ्लैट और पहड़िया स्थित प्लाट समेत अरबों की संपत्ति का जिक्र ही नहीं है।
शिवपुर निवासी राकेश न्यायिक ने अदालत से आरएस यादव की केस डायरी की प्रति निकलवाई तो इस मामले का खुलासा हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह से शिकायत की है, जिससे पुलिस महकमे में खलबली मच गई है।
इस मामले में चंदौली पुलिस का कहना है कि विजिलेंस को जांच सौंपते समय सारी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज संलग्न किए गए थे। विधिक प्रक्रिया पूरी कर विवेचना स्थानांतरित की गई थी।
वहीं, विजिलेंस का कहना है कि संपत्ति की जांच आय से अधिक संपत्ति की जांच का हिस्सा है। हालांकि आय से अधिक संपत्ति मामले में अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।
700 पन्नों में सौंपा गया साक्ष्य
एआरटीओ आरएस यादव
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आरएस यादव के खिलाफ आठ अगस्त 2017 में चंदौली थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले के प्रारंभिक विवेचक चंदौली के सीओ चकिया प्रदीप सिंह चंदेल के निर्देश पर राकेश न्यायिक ने लिखित बयान दर्ज कराया था।
साथ ही बेनामी संपत्तियों के संबंध में 700 पन्नों में साक्ष्य सौंपा था। इसमें वाराणसी, गोरखपुर व दिल्ली की संपत्तियों समेत 15 रजिस्ट्री और कई फर्जी कंपनियों का ब्यौरा था। बाद में शासन ने इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंप थी। चंदौली पुलिस से जांच लेकर एसपी विजिलेंस वाराणसी कार्यालय द्वारा शुरू की गई। इसके बाद चार सितंबर को विजिलेंस ने इस मामले में अदालत में आरोप पत्र दायर किया। अब अदालत में इसकी सुनवाई चल रही है।
इसी बीच मुकदमे की केस डायरी से पता चला कि उसमें होटल वेस्ट इन, गोरखपुर स्थित मॉल, दिल्ली के फ्लैट, पहड़िया स्थित प्लाट समेत अन्य बेनामी कंपनियों का जिक्र ही नहीं है। यादव के निजी चालक महेंद्र मौर्या और परिवार के लोगों को आरोपी नहीं बनाया गया।
निजी चालक का बयान तक नहीं लिया गया। विजिलेंस के अफसरों का कहना है कि वह आरएस यादव के भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति मामले की अलग-अलग जांच कर रहे हैं। संपत्ति की जांच आय से अधिक संपत्ति की जांच का हिस्सा है।
वसूली और भ्रष्टाचार के मामले में जो तथ्य सामने आए थे, उसे केस डायरी में शामिल किया गया है। वहीं, राकेश न्यायिक का आरोप है कि संपत्ति से जुड़े कागजात आरोप पत्र के साथ अदालत में दाखिल ही नहीं किए गए।