रंगमंच के कलाकार वैभव बिंदुसार, संगीता कुमार और मनोज विश्वकर्मा।
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मनोज विश्वकर्मा के लिए द्रोणाचार्य जैसे थे नाना
रंगमंच कलाकार और अभिनेता मनोज विश्वकर्मा ने नाना पाटेकर को अपना गुरु बताते हुए भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है, जैसे उन्होंने ऐसे गुरु को खो दिया हो, जिनसे वह कभी प्रत्यक्ष रूप से मिले ही नहीं। मनोज के मुताबिक, नाना उनके लिए द्रोणाचार्य की तरह थे। जब भी उन्हें रंगमंच, टीवी धारावाहिकों या फिल्मों में काम करने का अवसर मिला, उन्होंने नाना की तस्वीर को गुरु मानकर एकलव्य की तरह साधना करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि वह नहीं जानते कि एकलव्य की तरह उस आदर्श तक पहुंच पाएंगे या नहीं, लेकिन नाना के दिखाए रास्ते पर चलने का प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने दिवंगत अभिनेता को श्रद्धांजलि देते हुए ईश्वर से उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की।
सहजता और विचारों की विरासत हमेशा रहेगी
कलाकार वैभव बिंदुसार ने नाना पाटेकर के जीवन दर्शन और सहजता को याद किया। उन्होंने नाना के उस विचार का उल्लेख किया कि इंसान दुनिया से कुछ लेकर नहीं जाता और अंत में बारह मन लकड़ी ही उसकी संपत्ति होती है। वैभव ने कहा कि नाना ने अभिनय और व्यक्तित्व के जरिए जो विरासत सौंपी, वह कलाकारों के लिए अनमोल पूंजी है।
उन्होंने कहा कि नाना की सहजता उनके लिए सबसे बड़ी सीख है। वह भावुक और स्तब्ध हैं, लेकिन उन्हें विश्वास है कि नाना पाटेकर किसी खुशबू की तरह कलाकारों के बीच हमेशा मौजूद रहेंगे और अपनी कला व विचारों से उन्हें सही राह दिखाते रहेंगे।