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अर्द्धकुंभ : किन्नर अखाडे़ को नहीं मिली मान्यता, योगी की शरण में जाएंगे किन्नर

Fri, 12 May 2017 03:15 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, इलाहाबाद
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किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मी त्रिपाठी - फोटो : social media
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और किन्नर अखाड़ा परिषद के बीच विवाद और गहरा गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने किन्नर अखाड़े को मान्यता देने से साफ इनकार किया है।
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उन्होंने दो टूक कहा कि बतौर अखाड़ा, किन्नर अखाडे़ को मान्यता नहीं दी सकती है क्योंकि सनातन धर्म में सिर्फ तेरह अखाड़े ही हैं, इससे इतर किसी चौदहवें अखाड़े का सवाल ही नहीं उठता है। यह मांग सर्वथा अनुचित है। अब से पहले किन्नरों के पूर्वजों की ओर से ऐसी कोई मांग नहीं की गई थी, सो अब यह मांग करने का औचित्य नहीं है।
बृहस्पतिवार को मठ बाघंबरी गद्दी में किन्नर अखाडे़ की महंत पवित्रा से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा, सभी अखाडे़ आपका सम्मान करते हैं। ऐसे में किन्नर समुदाय के संत-महंत चाहें तो किसी भी अखाड़े का अंग बनकर अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को पूरा कर सकते हैं।
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वहीं किन्नर अखाड़े की महंत पवित्रा ने कहा, हमें परिषद की मान्यता की जरूरत नहीं है। धर्म सभी का है। मान्यता मिले या न मिले, प्रयाग अर्द्धकुंभ में स्वतंत्र डेरा लगेगा और अमृत स्नान भी करेंगे। आज की मुलाकात शिष्टाचारवश थी, हमें उम्मीद थी कि वह हमारी मांग मानेंगे। अस्वीकार की स्थिति में अब हम मुख्यमंत्री से मुलाकात करके अपनी मांग रखेंगे।
कब बना किन्नर अखाड़ा उज्जैन में 13 अक्तूबर 2015 को किन्नर अखाड़े की स्थापना हुई थी। बाद में 2016 के उज्जैन कुंभ में अखाड़े ने स्वतंत्र रूप से पेशवाई की जगह देवत्व यात्रा निकाली थी और शाही स्नान की जगह अमृत स्नान किया था।
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