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ओडिसी नृत्य में जीवंत हुआ शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप

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संकट मोचन संगीत समारोह की छठीं निशा में संगीत की हर विधा का समावेश नजर आया। सोमवार को संगीत समारोह की पहली प्रस्तुति में प्रख्यात ओडीसी नर्तक एवं आचार्य पं. केलुचरण महापात्रा के पुत्र रतिकांत महापात्रा ने शबरी प्रसंग की प्रस्तुति से आरंभ किया। इसके उपरांत सुजाता महापात्रा और उनकी टीम के साथ अन्य नृत्यांगनाओं ने मिलकर भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप की आराधना की।
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तीसरी प्रस्तुति में उड़ीसा से आए सभी कलाकारों ने संयुक्त रूप से नृत्य प्रदर्शन किया। चूड़ामणि प्रदानम शीर्षक से मंचित नृत्य नाट्य अंश के दौरान ऐसे भी क्षण आए जब सीता की करुणा और भक्त हनुमान का समर्पण देख दर्शक भी नृत्य के भाव से खुद को अलग नहीं रख सके। उनकी आंखों से अश्रुधार बह निकले। इस रचना का नृत्य संयोजन ओडिसी के महान आचार्य पं केलुचरण महापात्र और पं. रघुनाथ पाणिग्रही ने संगीतबद्ध किया था।
इसके बाद दूसरी प्रस्तुति में संयुक्ता दास ने राग मारूविहाग में गायन से शुरुआत की। प्रथम चरण में जहां उन्होंने ख्याल गायन किया। इसके बाद इसी राग में गायन करते हुए एक ताल के बाद तीन ताल में जागू मैं सारी रैना... की प्रस्तुति दी। राम कहत है... और अब कैसे छूटे राम रट लागी... का भी गायन किया। उनके साथ तबले पर पंकज राय और हारमोनियम पर मोहित साहनी ने संगत की।
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