वाराणसी के राजातालाब इलाके में पंचक्रोशी मार्ग के पास बभनियाव गांव में शिल्पग्राम मिलने की संभावनाओं के बाद अब पुरातत्वविद सक्रिय हो गए हैं। बीएचयू प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की टीम यहां 50 से अधिक जगहों पर सर्वेक्षण करने की तैयारी में है। बुधवार से ही बभनियाव पहुंचकर टीम के सदस्य खुदाई करवाएंगे। यहां का काम खत्म करने के बाद टीम की ओर से इस क्षेत्र में मिले अन्य टीलों का भी सर्वेक्षण कराया जाएगा।
बीएचयू के प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओएन सिंह के निर्देशन वाली टीम अब तक वाराणसी के साथ ही चंदौली, बिहार, फैजाबाद, हरियाणा, पंजाब के कई जगहों पर सर्वेक्षण का काम शुरू कर चुकी है। प्रो. सिंह ने बताया कि यूपीई(यूनिवर्सिटी फार पोटेंशियल आफ एक्सीलेंस) प्रोजेक्ट के तहत बभनियाव गांव में सर्वेक्षण के दौरान मिले पुरावशेषों के बारे में सही जानकारी खुदाई के बाद ही मिलेगी।
इसके अलावा औढ़े, खुशीपुर, महाबन आदि गांवों में भी करीब 50 टीलों का पता चला है। प्राथमिक स्तर पर सर्वेक्षण में यहां भी दो से ढाई हजार साल पहले के पुरावशेषों के होने की जानकारी मिली है। बताया कि इन जगहों की खुदाई के लिए भी एसआई से अनुमति मांगी जाएगी। आने वाले दिनों में एक-एक कर इन जगहों की खुदाई भी होगी।
बभनियाव गांव में तीन से चार हजार साल के पुरावेशषों की जानकारी मिलने की खबर से ग्रामीण बहुत खुश है। ग्राम प्रधान रत्नेश सिंह ने ग्रामीणों से यहां होने वाली खुद्राइ के बारे में चर्चा की। बताया कि गांव में प्राचीन भारतीय सभ्यता के पुरावशेषों का मिलना अपने आप में महत्वपूर्ण है। गांव के पुरनिये तथा पूर्व प्रधान उमाशंकर कहते हैं कि इसके अंदर स्वर्ण मंदिर होने की बात कोई करता है तो कोई रत्न होने की बात करता है।