उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में कुछ ईट भी मिली हैं। जो लगभग पंद्रह सौ वर्ष पूर्व की प्रतीत हो रही हैं। इतना ही नहीं विभाग के लोगों का अनुमान है कि उक्त मंदिर परिसर के पास से जल प्रवाह भी है जो की प्राचीन बस्ती के लोगों को जल स्रोत के रूप में था।
इस मंदिर के समीप भव्य मंदिर के साथ ही कई अनेक महत्वपूर्ण स्थल हैं। गांव के ही शिक्षक प्रमोद कुमार सिंह काफी दिनों से इस स्थल का पुरातत्व विभाग से सर्वेक्षण कराए जाने की मांग कर रहे थे। इस दौरान पुरातत्व विभाग की टीम से डॉ. अशोक कुमार सिंह, प्रो. अनिल कुमार दुबे, डॉ. संदीप, प्रभाकर उपाध्याय, डॉ. डीपी सिंह, डॉ. विनय कुमार रहे।