मूर्ख दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को 19वें धुरंधर हास्य महोत्सव का आयोजन किया गया। पं. हरिराम द्विवेदी को समर्पित कार्यक्रम का शुभारंभ उनके विश्व विख्यात गंगा वंदना मर्यादा है इस देश की पहचान है गंगा... के सामूहिक गान से हुआ। महोत्सव का उद्घाटन थूक चाटकर और सामूहिक रूप से दंत निपोरकर हुआ। इसके बाद चुनाव को सकुशल संपन्न कराने की कामना से ईवीएम को काला टीका लगाया गया।
अस्सी घाट पर आयोजित धुरंधर हास्य महोत्सव में रुद्रनाथ त्रिपाठी पुंज ने ईवीएम चालीसा का पाठ किया। लोकनाथ तिवारी अनगढ़ ने भोजपुरी प्रहसन, उमेश जायसवाल ने मिमिक्री प्रस्तुत किया। इस अवसर पर कवियों को मटकी की माला, हास्य चश्मा, पहनाया गया। उपहार में अगड़म बगड़म सामान व झुनझुना तथा कवियों को कविता चंदा के रूप में पांच लाख पैसे के इलेक्टोरल बॉन्ड दिए गए। इस अवसर पर पं. धर्मशील चतुर्वेदी स्मृति धुरंधर हास्य सम्मान हास्य कवि पवन बांके बिहारी, पं. हरिराम द्विवेदी स्मृति लोक कवि सम्मान कवि डॉ. कमलेश राय, पं. चंद्रशेखर मिश्र स्मृति ओज सम्मान अशोक अनहद को तथा पं. श्रीकृष्ण तिवारी स्मृति गीत सम्मान राजेंद्र तिवारी लल्लू को दिया गया। इस दौरान संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, प्रो. राजेश्वर आचार्य, डॉ. नागेश शांडिल्य, डॉ. धर्म प्रकाश मिश्र मौजूद रहे।