अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बतौर मतदाता महिलाओं ने अपनी शक्ति तो दिखाई लेकिन महिला प्रत्याशी कोई कमाल नहीं दिखा सकीं। जीत छोड़िए, किसी की जमानत तक नहीं बची। यहां तक कि रोहनिया से अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल की भी जमानत जब्त हो गई।
पिछले विधानसभा चुनाव में एक मात्र महिला विधायक के तौर पर रोहनिया से अनुप्रिया पटेल चुनी गई थीं लेकिन इस बार ‘आधी आबादी’ नुमाइंदगी की दौड़ में कहीं टिक नहीं पाई। मां कृष्णा पटेल से विवाद के बाद अनुप्रिया अपनी अलग पार्टी अपना दल (एस) बनाकर इस बार भाजपा के साथ थीं।
इसका उन्हें सेवापुरी में पार्टी की जीत के साथ फायदा भी हुआ लेकिन रोहनिया से खुद चुनाव मैदान में उतरीं अपना दल अध्यक्ष कृष्णा पटेल को पार्टी का बेस वोट भी नहीं मिला। कृष्णा पटेल को छोड़ किसी प्रमुख पार्टी की ओर से कोई महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं थी।
कुछ महिला प्रत्याशी छोटे दलों से या फिर निर्दल चुनाव मैदान में थीं। कृष्णा पटेल को महज 9549 वोट मिले जबकि इस सीट पर सुरेंद्र नारायण ने 1,19,676 मत हासिल कर जीत हासिल की। कृष्णा पटेल के बाद अजगरा से निर्दल लड़ी आरती ने भी साढ़े आठ हजार वोट हासिल किए लेकिन वो भी अपनी जमानत जब्त होने से नहीं बचा सकीं।
बाकी महिला प्रत्याशियों को महज नाम मात्र वोट मिले और सभी की जमानत जब्त हो गई। राजनीति के जानकारों का कहना है कि वोटिंग के मामले में महिला प्रत्याशियों के बजाए अधिकतर महिलाओं ने पार्टी विचारधारा के आधार पर मतदान किया।
ये ट्रेंड कोई नया नहीं है। इसमें बदलाव हो तो परिदृश्य बदल जाए लेकिन हर बार महिलाओं की वोटिंग का ट्रेंड लगभग यही होता है।
जिले की आठ विधानसभा सीटों के कुल 127 प्रत्याशियों में थीं महज आठ महिला प्रत्याशी
रोहनिया : कृष्णा पटेल - 9549, पार्वती देवी - 2926, शहर उत्तरी : किरण - 220, शहर दक्षिणी : रूबी फातमा - 799, प्रिया अग्रवाल - 106, ऋतिका रानी - 319, अजगरा : आरती - 8639, विद्या देवी - 448