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क्या राजभर का जाना अब अनुप्रिया पटेल का एनडीए में बढ़ाएगा कद?

Tue, 21 May 2019 12:57 PM IST
गीतार्जुन गौतम प्रदीप मिश्र,अमर उजाला,वाराणसी
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अनुप्रिया पटेल (फाइल फोटो)
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सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और उनके करीबी नेताओं की बर्खास्तगी के बाद अब यह तय है कि प्रदेश सरकार में नहीं, पूर्वांचल की राजनीति में अपना दल (एस) का वर्चस्व बढ़ेगा। प्रदेश में भाजपा ओमप्रकाश की अगुवाई वाली सुभासपा और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व वाले अद (एस) के साथ ही सरकार चला रही है।

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ऐसे में जिन आयोगों, निगमों और अन्य संस्थाओं में खाली स्थानों पर भाजपा नेताओं के बाद अद (एस) के नेताओं और कार्यकर्ताओं को समायोजित किया जाएगा। मौजूदा राजनीतिक हालात पर सपा-बसपा से लेकर कांग्रेस की पैनी नजर है, ताकि प्रदेश में भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने के लिए ओमप्रकाश उनके मददगार हो सकें।

लोकसभा चुनाव के नतीजों में ओमप्रकाश की ताकत समझने के बाद सभी दल अपने-अपने तरीके से ओमप्रकाश को अपने पाले में करने के लिए सक्रिय होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओमप्रकाश के विभाग स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री अनिल राजभर के हवाले कर राजभर बिरादरी को बताने-समझाने की कोशिश की है कि भाजपा को उनके हितों, साख और बिरादरी की संख्या का ख्याल है।
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लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद मंत्रिमंडल में विस्तार की अटकलें भी इस कार्रवाई में छिपी हुई हैं। पूर्वांचल की कई सीटों पर राजभर बिरादरी 30 हजार से डेढ़ लाख तक है।

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इसी के मद्देनजर बिरादरी साधाने के लिए भाजपा ने प्रदेश की सत्ता में आने के बाद अनिल राजभर को कम अनुभव के बिना स्वतंत्र प्रभार का मंत्री बनाया गया। बलिया के सकलदीप राजभर को राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। बाद में गाजीपुर में केंद्रीय संचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से महाराजा सुहेलदेव पर स्मारक डाक टिकट जारी कराया गया। मऊ से हरिनारायण राजभर लोकसभा में पहले से ही थे।

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राजभर को आठ सीटें दी थीं। इनमें से चार सीटों पर सुभासपा प्रत्याशी जीते, जिनमें दो गाजीपुर से थे। एक रामकोला (देवरिया) और एक अन्य वाराणसी के अजगरा से विधायक है। राज्यसभा चुनाव के दौरान लेन-देन के मामले को लेकर भाजपा के रिश्ते असहज हो गए थे।

सुहेलदेव पर डाक टिकट जारी होने के दौरान भी ओमप्रकाश बागी हो गए थे। उधर, इसी चुनाव में गठबंधन के बैनर तले 12 सीटों पर लड़ने वाले अद (एस) ने नौ सीटों पर जीत हासिल की थी। बाद में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल के विधान परिषद में चुनाव के बाद दोनों सदनों में उसकी संख्या 10 हो गई है।

लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अद (एस) को दो सीटों पर सीधे चुनाव लड़ाया है, वहीं प्रतापगढ़ सीट पर अद (एस) विधायक को अपने चुनाव चिह्न से चुनाव मैदान में उतारा है। हालांकि इस दौरान अद (एस) और भाजपा के रिश्तों में भी तल्खी पैदा हुई लेकिन इसको सुलझा लिया गया।
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