काशी में तंत्र दीक्षा अनुष्ठान करते एंटोन एंड्रीव
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पंडित आशापति शास्त्री ने बताया कि दुनिया में यूक्रेन और रूस से दीक्षा लेने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। गुरु वागीश शास्त्री और मेरे द्वारा अब तक 80 देशों के 15 हजार विदेशी शिष्यों को दीक्षा दी गई है। दीक्षा लेने की परंपरा 1980 में शुरू की गई थी। तब से लगातार यह काम चल रहा है। जो व्यक्ति पात्र है, उसी को दीक्षा दी जाती है।
एंटोन एंड्रिव ने बताया कि वह रूस में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट हैं। उन्हें रूस में बनारस के वागीश शास्त्री के बारे में पता चला और कुंडलिनी जागृत करने की इच्छा हुई। कुछ कक्षाएं भी लीं लेकिन पूरा नहीं कर पाए।
कई व्यवधान के बाद 2022 में गुरु वागीश शास्त्री का निधन हो गया था। 10 दिनों के ध्यान के दौरान मुझे जो अनुभूति हुई है उसको शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। यह सनातन धर्म और काशी की मिट्टी की शक्ति है, जिसने मेरी दीक्षा को पूर्ण किया।