वाराणसी में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जौनपुर से एक और जिला बनाने का संकेत देकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। सपा ने इसे लोकसभा चुनाव के मद्देनजर लोगों को बहकाने वाला बयान बताया है। वहीं शाहगंज के लोगों को जिला बनने की आस जगी है। शाहगंज को जिला बनाने की मांग 25 साल से की जा रही है।
शाहगंज तहसील क्षेत्र की आबादी 15 लाख से अधिक है। ऐसे में आजमगढ़, अंबेडकर नगर और सुल्तानपुर के कुछ हिस्सों को लेकर जिला बनाने की संभावना जताई जाती रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पिछले दिनों वाराणसी में संकेत दिया था कि जौनपुर में एक और जिला बनाया जा सकता है। इसके बाद शाहगंज को जिला बनाने को लेकर चर्चा होने लगी।
शाहगंज का पश्चिमी हिस्सा सुईथाकलां ब्लाक जिला मुख्यालय से 68 किलोमीटर दूर है। यहां के लोगों का कहना है कि शाहगंज जिला बनने के लिए उपयुक्त है। मायावती के शासन में जब चित्रकूट व महोबा को जिला बनाया गया तो वहां की जनसंख्या महज आठ लाख थी।
उस दौरान संजय विचार मंच के नेता डा. गयासुद्दीन हाशमी ने शाहगंज को जिला बनाने की मुहिम छेड़ी तो कांग्रेस नेता इंद्रमणि दुबे ने उनके समर्थन में आवाज उठाई थी। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शाहगंज को जिला बनाने की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद तत्कालीन सचिव राजस्व परिषद आनंद प्रकाश उपाध्याय ने 2008 में अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी।
तत्कालीन एसडीएम बाल मयंक मिश्र ने खुटहन रोड स्थित कटिया के समीप तहसील मुख्यालय व चीनी मिल परिसर की भूमि को चिह्नित करते हुए रिपोर्ट में भौगोलिक स्थिति का ब्योरा भेजा था। तत्कालीन एसडीएम ने राजकीय पुरुष अस्पताल, महिला अस्पताल, रोडवेज, रेलवे स्टेशन, डाकघर के अलावा गल्ला मंडी और बाजार का हवाला देते हुए इस पर मुहर लगाई थी।
एसडीएम ने शाहगंज को जिला बनाकर सुल्तानपुर जनपद के कादीपुर, आजमगढ़ के फूलपुर व घनश्यामपुर को मिलाने और खुटहन को तहसील मुख्यालय बनाने की रिपोर्ट दी थी। तत्कालीन एडीएम राजस्व देवेंद्र पांडेय, तत्कालीन डीएम अनुराग यादव ने इसकी संस्तुति देकर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। इसी दौरान चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने पर लोगों के सपने टूट गए थे।