संगीत भारत की विरासत है और काशी में उसका संग्रह है। यही वजह है कि यूनेस्को ने भी काशी को संगीत नगरी का मान दिया। विश्व भर के संगीत नगरी में काशी नौवें पायदान है और ये काशी के लिए बेहद गौरव की बात है।
यही वजह है कि 43 दिनों तक लगातार चलने वाला सुर गंगा कार्यक्रम की साक्षी काशी बनने जा रही है। काशी के गंगा तट पर शुक्रवार की शाम से शुरू होने वाले सबसे बड़े संगीत कार्यक्रम में शिरकत करने आए मशहूर टीवी कलाकार व अभिनेता अन्नू कपूर ने ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में देशभक्ति का मुजरा इसी बनारस के कोठे से निकला था। आजादी के समय बनारस की विद्याधरी देवी का वो देशभक्ति मुजरा सुर गंगा में तीसरी निशा में गूंजेगा। इसकी प्रस्तुति वह स्वयं करेंगे।
रामनगर स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि यूं ही यूनेस्को ने काशी को संगीत नगरी नहीं घोषित किया। यहां की आबोहवा में न केवल अध्यात्म है बल्कि संगीत भी रचा बसा है। काशी में संगीत की ये रवानी बनी रही इस उद्देश्य से ही शुक्रवार से इस सुर गंगा का आगाज होने जा रहा है। इसमें नामी गिरागी कलाकार शिरकत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संगीत और नृत्य के इस आयोजन से न सिर्फ संगीत प्रेमियों को काशी से जुड़ने का मौका मिलेगा बल्कि कलाकार भी एक नया अनुभव लेकर जाएंगे।
रिएलिटी शोज में वास्तविक आवाज को नहीं मिलती पहचान
Annu Kapoor mohit chauhan
- फोटो : अमर उजाला
बॉलीवुड सिंगर मोहित चौहान ने कहा काशी संगीत का संग्रह है। इस लिहाज से इसे संगीत नगरी का खिताब सही मायनों में मिला है। कहा कि यहां संगीत को गंगा का आशीर्वाद मिला हुआ है। काशी के घाट संगीत के लिए सबसे परफेक्ट जगह है।
पहली बार काशी में परफार्मेंस देने जा रहा हूं, मेरे लिए ये खुशी की बात है। रिएलिटी शो से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि संगीत एक साधना है। महज रिएलिटी शोज में परफार्म करके वो साधना हासिल नहीं की जा सकती। रिएलिटी शो में व्यक्ति सिर्फ दूसरे सिंगर की नकल कर सकता है, वास्तविक आवाज को पहचान नहीं मिलती।
शास्त्रीय गायक गुलाम मुस्तफा खां ने कहा कि यूनेस्को ने काशी को जो संगीत नगरी का खिताब दिया है, वो देर से सही लेकिन दुरुस्त है। शास्त्रीय संगीत में घट रहे रुझान पर उन्होंने कहा कि आज युवाओं में सब कुछ जल्दी पा लेने की होड़ सी मची है।
उन्हें बहुत जल्दी नाम चाहिए जबकि हमारे दौर में संगीत में गुरु और शिष्य की परंपरा के साथ साधना की परंपरा परवान पर थी। गुरुकुल कायम था। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत सीखने और सुनने दोनों में धीरज की जरूरत है।
दौड़ती भागती और इस बेचैन जिंदगी को शास्त्रीय संगीत ही सुकून दे सकती है। यही वजह है कि विदेशियों का इस ओर रुझान बढ़ रहा है। कंपोजर लुइस बैंक्स ने कहा कि अगर संगीत साधना करनी है कि शास्त्रीय से खुद को जोड़ना ही होगा। प्रेसवार्ता में तबला वादक विक्रम घोष भी मौजूद रहे।