500 साल पुरानी मूर्तियां हैं स्थापित
परंपरा के अनुसार, मां अन्नपूर्णा की स्वर्ण प्रतिमा वाला मंदिर साल में धनतेरस के मौके पर ही चार दिन के लिए खुलता है। दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट महोत्सव के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन इस बार दीपावली के दो दिन बाद अन्नकूट महोत्सव पड़ेगा। मंदिर में 500 साल पुरानी स्वर्ण मूर्तियां स्थापित हैं, जो मां अन्नपूर्णा की मूर्ति के साथ ही विराजमान हैं। मां अन्नपूर्णा के सामने खप्पर लिए खड़े भगवान शिव अन्नदान की मुद्रा में है। दाईं ओर मां लक्ष्मी और बाईं तरफ भूदेवी का स्वर्ण विग्रह है।
भगवान शिव ने मांगी थी मां अन्नपूर्णा से भिक्षा
मंदिर के महंत शंकर पुरी के अनुसार, धनतेरस के दिन मंदिर का अनमोल खजाना खोला जाता है। इसका महत्व मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाओं से है। माना जाता है कि एक बार काशी में अकाल पड़ा था। तब भगवान शिव ने लोगों का पेट भरने के लिए मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। मां ने भिक्षा के साथ भगवान शिव को यह वचन दिया कि काशी में कभी कोई भूखा नहीं सोएगा। काशी में आने वाले हर किसी को अन्न मां के ही आशीर्वाद से प्राप्त होता है।