काशी विश्वनाथ निर्माणाधीन कॉरिडोर
- फोटो : amar ujala
अर्चकों ने स्वयं आरती करने से मना कर दिया
मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है कि मंदिर के अर्चकों ने स्वयं आरती करने से मना कर दिया। इसके बाद हम लोगों ने मंदिर के पुजारियों से आरती संपन्न कराई। सतुआ बाबा आश्रम के महामंडलेश्वर सतुआ बाबा का कहना है कि विश्वनाथ मंदिर किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है। लॉकडाउन के दौरान पूजा अर्चना चल रही थी लेकिन आज अचानक कौन सी आफत आ गई जो सड़क पर पूजा करनी पड़ी। मैं मंदिर प्रशासन से अनुरोध करुंगा कि पूरे मामले की हकीकत काशीवासियों को बताएं।
पूर्व विधायक अजय राय ने सप्तर्षि आरती की परंपरा को ध्वस्त किए जाने पर मंदिर प्रशासन की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन को शताब्दियों से चली आ रही पंरपरा को ध्वस्त करने का अधिकार नहीं है। मंदिर प्रशासन मंदिर का स्वामी नहीं प्रबंधन में सहयोग के लिए है।
श्री काशी विश्वनाथ मुक्ति आंदोलन के अध्यक्ष सुधीर सिंह का कहना है कि प्रशासन का यह रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। बाबा की आरती की व्यवस्था पूर्ववत नहीं हुई तो काशी की जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
छलक पड़ी भक्तों की आंखें
आरती की प्रक्रिया के दौरान पार्थिव शिवलिंग पर चढ़ाया गया दूध सड़क पर बहता देख मौके पर मौजूद लोगों की आंखें छलक उठीं। सड़क पर आरती किए जाने का वीडियो देखते ही देखते पूरे शहर में वायरल हो गया। वीडियो देखने के बाद लोग सप्तर्षि आरती के अर्चकों को फोन करके मामले की जानकारी लेने का प्रयास करने लगे।
काशी विश्वनाथ निर्माणाधीन कॉरिडोर
- फोटो : amar ujala
एसएसपी ने किया था मुआयना
सप्तर्षि आरती के मुख्य अर्चक गुड्डू महाराज ने कहा कि बुधवार को जब उन्होंने कैलाश मंदिर को क्षतिग्रस्त देखा तो सबसे पहले महंत परिवार के अध्यक्ष डॉ. कुलपति तिवारी को इसकी सूचना दी। इसके बाद उन्होंने मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह और एसएसपी प्रभाकर चौधरी को सूचना दी। उनकी सूचना पर ही एसएसपी प्रभाकर चौधरी बृहस्पतिवार की सुबह मौका मुआयना करने के लिए रेड जोन स्थित कैलाश मंदिर पहुंचे थे।
जिनको नहीं आते सप्तर्षि के मंत्र, उनसे कैसे कराई आरती
पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने कहा कि बाबा विश्वनाथ की सप्तर्षि आरती का विधान विगत तीन सौ वर्षों से अधिक समय से महंत परिवार करता आ रहा है। उन्होंने इस पर भी आपत्ति की है कि मंदिर के जिन अर्चकों को सप्तर्षि आरती के मंत्र नहीं आते उनसे मंदिर प्रबंधन ने किस आधार पर और कैसे आरती कराई। यह विश्वनाथ मंदिर की परंपरा के साथ छेड़छाड़ है।
विरोध के बहाने सोशल डिस्टेसिंग का उल्लंघन
सड़क पर पूजा अर्चना के दौरान लॉक डाउन में सोशल डिस्टेसिंग का भी पूरी तरह उल्लंघन किया गया। अर्चकों के पास मास्क आदि नहीं था और विरोध के दौरान उनमें सोशल डिस्टेंस भी नहीं था। इस मुद्दे पर जिला प्रशासन गंभीर है और पूरे मामले की वीडियो रिकार्डिग मंगाई गई है।