फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश न मिलने से नाराज अर्चकों ने सड़क पर की सप्तर्षि आरती, तीन सौ सालों की परंपरा तोड़ने का आरोप

Fri, 08 May 2020 12:16 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

महंत परिवार के सदस्यों को सप्तर्षि आरती के लिए मंदिर में प्रवेश से रोके जाने से नाराज अर्चकों ने बृहस्पतिवार को बाबा विश्वनाथ की सप्तर्षि आरती सड़क पर की। अर्चकों ने सड़क पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर अर्चना भी की। महंत परिवार के सदस्यों का आरोप है कि कैलाश मंदिर का कुछ हिस्सा तोडने का विरोध करने के कारण उन्हें मंदिर में जाने से रोक दिया गया है जबकि मंदिर प्रशासन का कहना है कि अर्चकों ने आरती से इंकार कर दिया है। इसके कारण मंदिर प्रबंधन ने मंदिर के नियमित अर्चकों से बाबा की सप्तर्षि आरती कराई।

विज्ञापन


दरअसल, काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में ध्वस्तीकरण के दौरान एक प्राचीन मंदिर सामने आया है। बुधवार की देर रात इस मंदिर के क्षतिग्रस्त होने की अफवाह के बाद से ही माहौल में तनाव है। महंत परिवार के सदस्यों का आरोप है कि बृहस्पतिवार की शाम को सप्तर्षि आरती की सामग्री के साथ विश्वनाथ मंदिर पहुंचे तो उन्हें ढुंढिराज द्वार पर सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया।

रोकने का कारण पूछने पर बताया गया कि यह रोक एसपी ज्ञानवापी के आदेश पर है। आरती के मुख्य अर्चक गुड्डू महाराज ने एसपी ज्ञानवापी से बात की तो अर्चकों को ज्ञानवापी स्थित गेट नंबर चार पर बुलाया। सभी अर्चक ज्ञानवापी पहुंचे तो वहां से भी उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया।
विज्ञापन


प्रतीक्षा करने के बाद जब कोई सक्षम अधिकारी उनका पक्ष सुनने के लिए नहीं पहुंचा तो सप्तर्षि आरती के अर्चकों ने सड़क पर ही आरती करने का निश्चय किया। अर्चकों ने एक पार्थिव शिवलिंग बनाया और उसे ज्ञानवापी द्वार के सामने सड़क पर ही रखकर सप्तर्षि आरती शुरू कर दी। सड़क पर आरती होती देख कर आसपास के भवनों में रहने वाले लोग हतप्रभ हो गए।

Trending Videos

काशी विश्वनाथ निर्माणाधीन कॉरिडोर - फोटो : amar ujala

अर्चकों ने स्वयं आरती करने से मना कर दिया

मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है कि मंदिर के अर्चकों ने स्वयं आरती करने से मना कर दिया। इसके बाद हम लोगों ने मंदिर के पुजारियों से आरती संपन्न कराई। सतुआ बाबा आश्रम के महामंडलेश्वर सतुआ बाबा का कहना है कि विश्वनाथ मंदिर किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है। लॉकडाउन के दौरान पूजा अर्चना चल रही थी लेकिन आज अचानक कौन सी आफत आ गई जो सड़क पर पूजा करनी पड़ी। मैं मंदिर प्रशासन से अनुरोध करुंगा कि पूरे मामले की हकीकत काशीवासियों को बताएं।
पूर्व विधायक अजय राय ने सप्तर्षि आरती की परंपरा को ध्वस्त किए जाने पर मंदिर प्रशासन की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन को शताब्दियों से चली आ रही पंरपरा को ध्वस्त करने का अधिकार नहीं है। मंदिर प्रशासन मंदिर का स्वामी नहीं प्रबंधन में सहयोग के लिए है।
 
श्री काशी विश्वनाथ मुक्ति आंदोलन के अध्यक्ष सुधीर सिंह का कहना है कि प्रशासन का यह रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। बाबा की आरती की व्यवस्था पूर्ववत नहीं हुई तो काशी की जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी। 

छलक पड़ी भक्तों की आंखें

आरती की प्रक्रिया के दौरान पार्थिव शिवलिंग पर चढ़ाया गया दूध सड़क पर बहता देख मौके पर मौजूद लोगों की आंखें छलक उठीं। सड़क पर आरती किए जाने का वीडियो देखते ही देखते पूरे शहर में वायरल हो गया। वीडियो देखने के बाद लोग सप्तर्षि आरती के अर्चकों को फोन करके मामले की जानकारी लेने का प्रयास करने लगे। 
विज्ञापन

काशी विश्वनाथ निर्माणाधीन कॉरिडोर - फोटो : amar ujala

एसएसपी ने किया था मुआयना

सप्तर्षि आरती के मुख्य अर्चक गुड्डू महाराज ने कहा कि बुधवार को जब उन्होंने कैलाश मंदिर को क्षतिग्रस्त देखा तो सबसे पहले महंत परिवार के अध्यक्ष डॉ. कुलपति तिवारी को इसकी सूचना दी। इसके बाद उन्होंने मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह और एसएसपी प्रभाकर चौधरी को सूचना दी। उनकी सूचना पर ही एसएसपी प्रभाकर चौधरी बृहस्पतिवार की सुबह मौका मुआयना करने के लिए रेड जोन स्थित कैलाश मंदिर पहुंचे थे।

जिनको नहीं आते सप्तर्षि के मंत्र, उनसे कैसे कराई आरती

पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने कहा कि बाबा विश्वनाथ की सप्तर्षि आरती का विधान विगत तीन सौ वर्षों से अधिक समय से महंत परिवार करता आ रहा है। उन्होंने इस पर भी आपत्ति की है कि मंदिर के जिन अर्चकों को सप्तर्षि आरती के मंत्र नहीं आते उनसे मंदिर प्रबंधन ने किस आधार पर और कैसे आरती कराई। यह विश्वनाथ मंदिर की परंपरा के साथ छेड़छाड़ है।

विरोध के बहाने सोशल डिस्टेसिंग का उल्लंघन

सड़क पर पूजा अर्चना के दौरान लॉक डाउन में सोशल डिस्टेसिंग का भी पूरी तरह उल्लंघन किया गया। अर्चकों के पास मास्क आदि नहीं था और विरोध के दौरान उनमें सोशल डिस्टेंस भी नहीं था। इस मुद्दे पर जिला प्रशासन गंभीर है और पूरे मामले की वीडियो रिकार्डिग मंगाई गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें