फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुरातात्विक खुदाई में मिला प्रमाण, इतने साल पहले बसी थी काशी

Wed, 27 Feb 2019 04:16 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
विज्ञापन
प्रो. उमाकांत शुक्ल प्रमाणों को समझाते हुए - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विश्व की प्राचीन नगरी कही जाने वाली काशी का जिक्र तो वेद और पुराणों में भी है। लेकिन काशी की उम्र क्या है यह हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है। किसी ने ठीक ही कहा है कि गंगा और काशी एक दूसरे के पूरक है। इसी रिश्ते को सिद्ध कर दिया है वाराणसी में हुई पुरातात्विक खुदाई ने।

विज्ञापन


आईआईटी बीएचयू में काशी कथा के तहत चल रही कार्यशाला के ग्यारहवें दिन काशी के बसने और गंगा अवतरण पर मंथन हुआ। जिसमें मुख्य वक्ता प्रो. उमाकांत शुक्ल ने कहा कि रामनगर और राजघाट में हुई पुरातात्विक खुदाई में 3800 साल पहले काशी के बसने का प्रमाण मिलता है।

मालवीय उद्यमिता संवर्धन केंद्र में चल रही कार्यशाला में प्रो. शुक्ल ने कहा कि काशी में गंगा का आगमन 40 हजार साल पहले हुआ था। गंगा अपने वर्तमान स्वरूप में सात हजार साल से है। ऐसा टेक्टोनिक प्लेटों में हलचल के कारण हुआ था, जिससे इस क्षेत्र में दो बड़े भूकंप आने के प्रमाण मिलते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

काशी में कभी भूकंप नहीं आ सकता

Earthquake
काशी की भौगोलिक अवस्थापना ऐसी है कि यहां कभी भी भूकंप, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा नहीं आ सकती। पहले घाटों को और उनके ऊपर बड़ी इमारतें बनाने के पीछे उद्देश्य यही था कि गंगा शहर को खत्म न कर दें।
 
काशी के भौगोलिक सर्वेक्षण पर बोलते हुए प्रो. पृथ्वीश नाग ने कहा कि बनारस प्राचीन नगर ही नहीं, सबसे प्राचीन सुनियोजित शहर भी है। पक्का महाल, संकरी गलियां, ड्रेनेज सिस्टम और तालाबों का जाल इस तथ्य की पुष्टि करता है। उन्होंने स्लाइड के माध्यम से रिमोट सेंसिंग द्वारा बनाए मानचित्र की व्याख्या की। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें