कथा अनुसार कौरवों से जुआ हारने के बाद पांडव वन-वन भटक रहे थे तब श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा हे धर्मराज! जुआ खेलने के कारण देवी लक्ष्मी आप से रुष्ट हो गई हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए आपको अपने भाइयों के साथ अनंत चतुर्दशी का व्रत रखना चाहिए। श्रीकृष्ण के कहने पर सर्वप्रथम पांडवों ने अनंत का व्रत किया, जिससे खोया हुआ राज्य और लक्ष्मी को पुन: प्राप्त किया।
प्रात: काल स्नानादि उपरांत भगवान विष्णु का ध्यान कर संकल्प लेना चाहिए। चौकी पर मंडप बनाकर भगवान विष्णु के समक्ष 14 गांठ युक्त अनंत सूत्र जो रेशम या कॉटन का पूजन करना चाहिए। कथा श्रवण करने के उपरांत भगवान विष्णु से मंत्र अनंत संसार महासुमद्रे मग्न समभ्युद्धर वासुदेव। अनंत रूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।। से प्रार्थना करनी चाहिए।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि अनंत सूत्र कच्चे धागे को गांठ लगाकर बनाया जाता है। तत्पश्चात उसे हल्दी से रंगकर विधि-विधान पूर्वक, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प आदि से पूजा की जाती है। इस सूत्र को अनंत सूत्र कहते हैं। इस सूत्र को पुरुष दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ की भुजा में धारण करती हैं। व्रतकर्ता को व्रत वाले दिन, दिन में शयन नहीं करना चाहिए। अनंत सूत्र को 14 दिन तक धारण करने के पश्चात 15वें दिन गंगाजी, नदी, सरोवर अथवा स्वच्छ जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। व्रत के दिन नमक ग्रहण नहीं किया जाता है।