उन्होंने बताया कि 17 अक्तूबर को पहले सत्र में ‘गुप्त वंशक वीर का उदय: हूणों का आक्रमण, तत्कालीन अन्य राजनीतिक चुनौतियां एवं स्कंदगुप्त का पराक्रम और दूसरे सत्र में स्कंदगुप्त विक्रमादित्य कालीन पुरावैभव, उत्खनन-अभिलेख-मुद्राएं एवं साहित्य पर चर्चा की जाएगी। इसमें गाजीपुर के भित्तरी में बने हूण विनाशक विजय स्तंभ पर भी चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि आज की राजनीतिक और वैश्विक परिस्थिति में स्कंदगुप्त विक्रमादित्य का स्मरण स्वभाविक है।