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काशी में बोले अमित शाह: मध्य क्षेत्रीय परिषद ही एकमात्र क्षेत्रीय परिषद, जहां किसी राज्य के बीच कोई विवाद नहीं

Wed, 25 Jun 2025 09:27 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक संपन्न हुई। इस दौरान उन्होंने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद ही एकमात्र ऐसी क्षेत्रीय परिषद है, जहां दो सदस्य राज्यों के बीच किसी प्रकार की कोई समस्या या विवाद नहीं है।
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काशी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद ही एकमात्र ऐसी क्षेत्रीय परिषद है, जहां दो सदस्य राज्यों के बीच किसी प्रकार की कोई समस्या या विवाद नहीं है। शाह मंगलवार को काशी में नदेसर स्थित ताज होटल में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

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गृहमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने में मध्य क्षेत्रीय परिषद के राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। गृहमंत्री ने कहा कि जहां 2004-14 तक जोनल कौंसिल की सिर्फ 11 बैठक और स्टैंडिंग कमेटी ऑफ जोनल कॉसिल्स की सिर्फ 14 बैठक हुई थी।

बैठक में गृहमंत्री, सभी मुख्यमंत्री और सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और भारतीय सशस्त्र सेनाओं के पराक्रम पर अभिनंदन प्रस्ताव रखा, जिसे परिषद ने ध्वनिमत से अनुमोदित किया। भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिये आतंकियों को करारा जवाब दिया था। वहीं, 2014-25 में जोनल कौंसिल की 28 बैठक और स्टैंडिंग कमेटी ऑफ जोनल कौंसिल्स की 33 बैठक हो चुकी है। 

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ये है क्षेत्रीय परिषद 

इन बैठकों में अब तक 1287 मुद्दों का निराकरण किया गया है। मंगलवार को हुई बैठक में 19 मुद्दों पर चर्चा हुई हैं। इनमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ दुष्कर्म के मामलों की त्वरित जांच और इनके तेजी से निस्तारण के निर्देश दिए गए। कहा गया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट और विशेष न्यायालयों में इनसे जुड़े मामलों की प्रभावी पैरवी कराई जाए। हर गांव के नियत दायरे में ब्रिक-एंड-मोर्टार बैंकिंग सुविधा और आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली के मुद्दों पर चर्चा की गई।

राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 से 22 के तहत पांच क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना की गई थी। केंद्रीय गृहमंत्री इन पांचों क्षेत्रीय परिषदों के अध्यक्ष हैं। सदस्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री/उप-राज्यपाल/प्रशासक इनके सदस्य हैं। सदस्य राज्यों से एक राज्य के मुख्यमंत्री (हर साल वारी-वारी से) उपाध्यक्ष होते हैं। प्रत्येक सदस्य राज्य से राज्यपाल द्वारा 2 मंत्रियों को परिषद के सदस्य के रूप में नामित किया जाता है।

गृहमंत्री, यूपी, एमपी, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, सदस्यों ने भारतीय सशस्त्र सेनाओं के पराक्रम के अभिनंदन का प्रस्ताव अनुमोदित किया

ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाएं

गृहमंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय परिषद के सभी राज्य बच्चों में कुपोषण दूर करने, ड्रॉप-आउट रोकने और सहकारिता को सुदृढ़ बनाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की आय बढ़ानी जरूरी है। इसके लिए यदि नियम बनाने पड़े तो बनाइए, लेकिन ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाइए। कहा कि पंचायतों की आय बढ़ने से ही त्रिस्तरीय लोकतांत्रिक पंचायती राज व्यवस्था और अधिक कारगर होगी।

बैठक में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय मौजूद रहे। इसके अलावा राज्यों के मंत्री, केंद्रीय गृह सचिव, अंतर राज्य परिषद सचिवालय के सचिव, सदस्य राज्यों के मुख्य सचिव और राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्य सचिवों के स्तर पर एक स्थायी समिति का गठन
बैठक में प्रत्येक क्षेत्रीय परिषद ने मुख्य सचिवों के स्तर पर एक स्थायी समिति का गठन किया गया है। अब राज्यों के प्रस्तावित मुद्दों को पहले संबंधित क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समितियों के समक्ष चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। स्थायी समितियों में चर्चा के बाद ही इन्हें आगे बढ़ाया जाएगा, फिर इसे अगली मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में रखा जाएगा।
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11 साल में 62 बैठकें, अगली बैठक छत्तीसगढ़ के बस्तर में

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सभी राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सहयोग से पिछले ग्यारह साल में विभिन्न क्षेत्रीय परिषदों और इनकी स्थायी समितियों की अब तक कुल 62 बैठकें हुई हैं। प्रधानमंत्री ने देश के सर्वांगीण विकास के लिए सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद का लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल देने को कहा है।

उन्होंने कहा कि मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र बनाते हैं, की भावना से क्षेत्रीय परिषद दो या अधिक राज्यों अथवा केंद्र और राज्यों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर संवाद और चर्चा के लिए एक व्यवस्थित तंत्र विकसित करें। क्षेत्रीय परिपदों की भूमिका सलाहकारी है, लेकिन पिछले कुछ साल में ये परिषद विभिन्न क्षेत्रों में आपसी समझ और सहयोग के स्वस्थ बंधन को वढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कारक सावित हुई हैं। मालूम हो कि मध्य क्षेत्रीय परिषद की अगली बैठक छत्तीसगढ़ के बस्तर में होगी।
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