फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Exclusive: फसलों को घोंघा से बचाने के लिए अमेरिका ने BHU के पूर्व छात्र को दिए 5.47 करोड़, पढ़ें- पूरा मामला

Thu, 07 Nov 2024 10:17 AM IST
प्रगति चंद हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला, वाराणसी।

सार

दक्षिण भारत में फसलों पर विशालकाय अफ्रीकी घोंघों ने तबाही मचाई है। ऐसे में फसलों को घोंघा अटैक से बचाने के लिए अमेरिका ने बीएचयू के पूर्व छात्र को 5.47 करोड़ दिए हैं। 
विज्ञापन
घोंघा अटैक से बचाने वाले दानों को एकत्र करते वैज्ञानिक व बीएचयू के पूर्व छात्र अभिनव मौर्या - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कृषि फसलों को घोंघे की मार से बचाने के लिए अमेरिकी सरकार ने बीएचयू के पूर्व छात्र अभिनव मौर्या को 5.47 करोड़ रुपये का ग्रांट दिया है। अमेरिकी कृषि विभाग के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर ने स्मॉल बिजनेस इनोवेशन रिसर्च के नाम से ये फंड जारी किया है। उन्हें स्नेल और स्लग पर कंट्रोल के लिए ये फंड दिया गया है। अब अभिनव भारत और आसपास के देशों में कीट नियंत्रण के लिए दो साल तक रिसर्च करेंगे।

विज्ञापन


अभिनव ने बताया कि स्नेल यानी शंख वाला घोंघा और स्लग यानी बिना खोल वाला घोंघा। केरल समेत दक्षिण भारत में विशालकाय अफ्रीकी घोंघों का हमला कृषि फसलों पर काफी बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने इसे दुनिया की 100 सबसे घातक प्रजातियों की सूची में शामिल किया है। इस तरह से भारतीय को इस पर रिसर्च के लिए ग्रांट मिलना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

फलों-सब्जियों और फसलों के जड़ों का भी नुकसान

जौनपुर के खपरहां स्थित समसपुर गांव के निवासी अभिनव बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान से बीएससी-एजी किया है। इन दिनों अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एपेक्स बेट टेक्नोलॉजीज में चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर हैं। अभिनव ने अपने रिसर्च में घोंघों की समस्या को खत्म करने के लिए एक बेट फॉर्मूलेशन की तकनीक तैयार की है। इसे सेमियो केमिकल बेट टेक्नोलॉजी का नाम दिया है। इसमें इन्होंने ग्रैन्यूल्स यानी कि पशुआहार के आकार जैसे दाने बनाए हैं।

बुआई के समय खेत को बीच में कहीं थोड़ी सी खाली जगह छोड़ देनी चाहिए। इन दानों का इसी जगह पर छिड़काव किया जाता है। इससे दोनों तरह के घोंघे फसलों से दूर बीच में एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं। यहां पर वो इसे खाएंगे और वहीं मर कर खाद बन जाएंगे। इससे फसलों में रत्ती भर भी केमिकल नहीं मिलता।
विज्ञापन

सैकड़ों मिलियन डॉलर का होता है नुकसान

अभिनव ने बताया कि ये फंडिंग हमारी कीट बाइट तकनीक पर भरोसा बढ़ाने वाली है। दोनों तरह के घोंघे फलों और सब्जियों के साथ ही पौधों के जड़ों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाते हैं। वैश्विक स्तर पर इस हानि का अनुमान सैकड़ों मिलियन डॉलर में है। अभिनव ने बताया कि कंपनी इस समस्या से पार पाने के लिए एक सस्ता और इको फ्रेंडली समाधान निकाल रही है। इस ग्रांट को पाकर काफी उत्साहित हूं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें