महिलाओं को मानसिक तौर पर भी स्वतंत्र होना चाहिए। सशक्तीकरण का मतलब सिर्फ नौकरी करना नहीं होता है। - डाॅ. पारुल जैन
महिलाओं की ओर से जो उत्पाद बनाए जा रहे हैं उसे बाजार भी उन्हें मिलना चाहिए। - नीता तिवारी
सशक्तीकरण की बात होती है लेकिन बराबर की संख्या नहीं है। नीतियों में बदलाव से कुछ नहीं होगा। - पल्लवी पाठक
शिक्षा के साथ ही संस्कार भी जरूरी हैं। महिलाएं अब अबला नहीं हैं, इसे मानकर आगे बढ़ना होगा। - भानुमति मिश्रा
आत्मविश्वास रहेगा तो कोई चुनौती नहीं रहेगी। - सविता चौरसिया
महिला अपराध पर तत्काल न्याय की व्यवस्था होनी चाहिए। - नीलम वर्मा
महिलाएं शक्ति का स्वरूप हैं। दूसरों का खयाल रखती हैं। - ऋतु जायसवाल
हमें अपना विजन बड़ा करना होगा। पूर्वजों से जो संस्कार मिले हैं, उसे आगे बढ़ाना चाहिए। - देवश्री गुप्ता
पुरुष अगर नशा करते हैं ताे उसका असर महिलाओं पर पड़ता है। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। - डॉली श्रीवास्तव
बच्चों को संस्कारवान बनाएं। नैतिकता, सामाजिकता का पाठ पढ़ाना जरूरी है। - वीना पांडेय
वर्तमान में टीन-ऐजर्स और बीच की पीढ़ी सबसे अधिक परेशान है। सरकार को काउंसलर की व्यवस्था करनी चाहिए। - प्रो. संध्या ओझा
महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देतीं। उन्हें लगता है कि वे कमजोर हैं। यही उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। - शशि श्रीवास्तव
महिलाओं के लिए बैंकिंग आसान की जानी चाहिए। पूरा सहयोग नहीं मिल पा रहा। - डा. शारदा सिंह
लड़कियों की तरह ही लड़कों को भी घर के काम आने चाहिए। घर के काम में पुरुषों को मदद करनी चाहिए। - एकता पारिख
आधुनिकता में हम अपना दायित्व भूल गए हैं। मां और मातृत्व को संरक्षित करना आवश्यक है। - डाॅ. भारती मिश्रा
सरकार की योजनाएं धरातल तक नहीं पहुंच रही हैं। इस कारण भी महिलाओं का उत्थान नहीं हो पा रहा। - प्रतिभा सिंह
हम आज भी महिलाओं को पीछे रख रहे हैं। यह समस्या सोशल मीडिया के कारण है। सरकार को नियमों में सख्ती करनी चाहिए। - सीमा अग्रवाल
महिलाएं शिक्षित हों तभी सशक्तीकरण का संदेश सफल होगा। - डाॅ. प्रियंका वहल
दुष्कर्म पीड़िताओं के लिए काउंसिलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे समाज में बदलाव की उम्मीद बनी रहेगी। - शिखा वर्मा
सशक्तीकरण के नाम पर जो स्वतंत्रता मिली है, उसका सदुपयोग करना चाहिए। - प्रेरणा कश्यप
पहले देश कृषि प्रधान था फिर पुरुष प्रधान हो गया। महिलाएं आर्थिक सशक्त बनें तब जा कर बदलाव आएगा। - अनुपमा सिंह
महिलाएं अगर कोई रोजगार शुरु कर रही हैं, उन्हें बाजार नहीं मिल रहा है। यह बड़ी चुनौती है। - बीना सिंह
सशक्तीकरण की बात करते हैं लेकिन हम रोल मॉडल नहीं हैं। अब रोल मॉडल बनाना होगा। - स्मिता लोहिया
बच्चों को संस्कारी बनाने में माता-पिता का योगदान बराबर का होना चाहिए। बेटे-बेटियों की परवरिश एक सी करनी चाहिए। - नेहा सिंह
गड़बड़ी घर से होती है। पहले वहां सुधार करें तो समाज में भी सुधार आएगा। - डा. शीला चौधरी
महिलाओं को समाज में बराबर का दर्जा मिलना चाहिए। अगर वो काम कर रही हैं तो उनका नाम होना चाहिए । उनके पतियों का नहीं। - वर्षा सेठ
महिलाओं और पुरुषों में न अंतर होना चाहिए और न ही कोई भेदभाव। - डाॅ. पूनम
बच्चों को सनातन का संस्कार देना आवश्यक है। बच्चे अच्छा करेंगे तो समाज अच्छा होगा। - डॉ. विनीता
लड़कियों को सिर्फ शादी के लिए पढ़ाना ठीक नहीं है। इसे सशक्तीकरण नहीं कहा जा सकता। - वीना सिंह
बेटियों को आत्मरक्षा का गुर सीखना चाहिए। - संतोषी शुक्ला
सरकार को नशे पर पूरी तरह से रोक लगानी चाहिए।
- श्वेता श्रीवास्तव
महिलाओं को उनके अधिकार की जानकारी होनी चाहिए। शिक्षित होना जरूरी है।
- नीतू सिंह
हमें घर और समाज को मजबूत करना होगा।
- प्रीति जायसवाल
बहू के साथ बेटी जैसा व्यवहार करना चाहिए। सास जैसा व्यवहार ठीक नहीं है।
- माया जायसवाल
सशक्तीकरण हमें स्वस्थ, समृद्ध और संरक्षण का संदेश देता है। अब खुद को उदाहरण बनाना चाहिए।
- डा. रिया द्विवेदी
हमें अपने अधिकार मिलने चाहिए। पुरुषों से बराबरी का कोई इरादा नहीं है।
- रश्मि डिडवनिया