एआई को-पायलट, ऑटो पायलट की तरह नहीं
आई इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर के वक्त इलाज में ज्यादा मदद कर सकता है। ट्रॉमा के वक्त जब टाइम इज टिशू, मतलब हर सेकंड अहम है तब एआई डॉक्टर को पेशेंट की दिक्कत समझने में आसानी पैदा करेगा। एआई के जरिये जल्दी फैसला लेने से कई बार जिंदगीभर की दिक्कत से मरीज को बचाया जा सकता है। बीएचयू को या इस तरह के बड़े अस्पतालों को कमांड सेंटर की तरह काम करना चाहिए और उससे जुड़े पीएचसी, सीएचसी को एआई से जोड़ना चाहिए। - प्रो. विक्रम गुप्ता, एनेस्थिसिया, आइएमस, बीएचयू
एआई बेस्ड मशीनों ने डॉक्टर के काम को आसान किया
यनकोलॉजी में आइवीएफ केस के लिए एआई ये डिटेक्ट कर बता देता है कि कौन सा एम्ब्रियो ट्रांसप्लांट करना है। प्री जेनेटिंग टेस्टिंग में काफी मदद करता है। लेट प्रेगनेंसी में क्या रिस्क है ये मरीज की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री देखकर पता कर लेता है इसलिए एआई मेडिकल साइंस में रिस्क मैनेजमेंट में काफी सहायक है। इसके अलावा एआई बेस्ड जो मशीनें आ रही हैं उन्होंने डॉक्टर के काम को आसान किया है। - डॉक्टर ममता, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बीएचयू
एआई केवल उपकरण है, चिकित्सक का विकल्प नहींं
आई केवल उपकरण है, चिकित्सक का विकल्प नहींं है। डेंटिस्ट में टेढ़ा मेढ़ा काम पेशेंट को समझाना होता है। ऐसे में एआई की मदद से आप रिजल्ट क्या होगा ये आसानी से दिखा सकते हैं। एआई जो मूवमेंट दांतों का बनाकर देता है, वो 90 प्रतिशत सही होता है। पहले के जमाने में पुट्टी से मिक्स बनाकर सांचा तैयार करना होता था। अब कुछ सेकंड में एआई सब बना देता है। - डॉ अमर अनुपम, सचिव, इंडियन डेंटल एसोसिएशन