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अमर उजाला पड़ताल: 3 दिन में 5 मरे फिर भी स्टेशन के स्वास्थ्य केंद्र में लटका ताला, काशी के स्टेशनों का हाल

Tue, 18 Jun 2024 04:55 PM IST
अमन विश्वकर्मा रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: वाराणसी रेलवे स्टेशन के बाहर कुछ ही दूर पर एक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन सोमवार की दोपहर में यहां ताला लगा रहा। ओपीडी का समय तो यहां लिखा था लेकिन इमरजेंसी जैसी कोई सुविधा नहीं मिलती है।
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कैंट रेलवे स्टेशन के स्वास्थ्य केंद्र पर लगा ताला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भीषण गर्मी और लू में रेलवे स्टेशनों पर आए दिन यात्री बीमार हो रहे हैं। प्लेटफाॅर्म पर बैठे-बैठे जान जा रही है, लेकिन अगर किसी की तबीयत बिगड़ जाए तो तुरंत स्टेशन पर इलाज मिलना मुश्किल है। सोमवार को अमर उजाला की पड़ताल में वाराणसी रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी और बनारस रेलवे स्टेशन पर न तो कोई हेल्थ बूथ दिखा और किसी तरह की प्राथमिक उपचार की व्यवस्था मिली। इस तरह की स्थिति तब है जब तीन दिन में ही पांच यात्रियों की गर्मी के कारण मौत हो गई हैं।

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काशी में हर दिन करीब ढाई लाख लोग आते हैं। इसमें करीब एक लाख से अधिक लोग ट्रेन से सफर कर यहां आते हैं। बुधवार को वाराणसी कैंट, वाराणसी सिटी और बनारस स्टेशन पर प्राथमिक उपचार तक की व्यवस्था नहीं दिखी। यहां तबीयत बिगड़ने के बाद यात्रियों को मंडलीय अस्पताल और अन्य अस्पताल लेकर जाया जाता है।

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वाराणसी रेलवे स्टेशन: यात्री हाॅल से प्लेटफाॅर्म तक भीड़, नहीं दिखा हेल्थ बूथ

सोमवार को वाराणसी स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली। प्लेटफार्म नंबर 1 से लेकर अन्य प्लेटफाॅर्म तक कहीं भी कोई प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं दिखी। इसी स्टेेशन के प्लेटफाॅर्म नंबर पर दो पर एक यात्री अचानक रविवार को गिरकर बेहोश हो गया था। उसको तुरंत इलाज नहीं मिला, जिससे उसकी जान चली गई। सोमवार को भी एक यात्री की जान गर्मी की वजह से चली गई।

बनारस रेलवे स्टेशन: तबीयत बिगड़ने पर तुरंत नहीं मिलेगा उपचार
बनारस रेलवे स्टेशन पर भी स्वास्थ्य की सुविधाओं का हाल बेहाल है। यहां किसी तरह का कोई हेल्थ बूथ नहीं है, जहां की तबीयत बिगड़ने पर तुरंत प्राथमिक उपचार मिल सके। प्लेटफाॅर्म नंबर एक पर एक छोेटा सा जांच केंद्र बना है, जहां निर्धारित फीस देकर यात्री अपना जांच करवा सकते हैं। बाहर वन रुपी क्लीनिक भी है, लेकिन दोपहर में यहां भी ताला बंद दिखा।

केस-1: बैठेे-बैठै चक्कर आ गया तो प्लेटफाॅर्म पर लेट गए रामप्रवेश
बिहार निवासी रामप्रवेश सोमवार की दोपहर में प्लेटफाॅर्म नंबर एक पर बैठै रहे। दोपहर करीब एक बजे बैठै-बैठे चक्कर आ गया। कुछ देर बाद जब सहन नहीं हुआ तो वहीं जमीन पर लेट गए। आसपास के लोगों ने पहले प्लेटफाॅर्म पर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था देखी, जब कुछ नहीं मिला तो उन्हेें पंखे के नीचे लेटने की सलाह दी। रामप्रवेश ने बताया कि चक्कर आ गया।

केस-2: स्टेेशन पर नहीं मिली व्यवस्था
काशी भ्रमण पर आए गोरखपुर निवासी सुभाष जायसवाल वाराणसी सिटी रेलवे स्टेेशन के बाहर खड़े थे। दोपहर करीब दो बजे वह स्टेेशन पहुंचे। बताया कि धूप इतनी तेज थी कि देखते-देखते आंखों के सामने अंधेरा छा गया। बेचैनी होने लगी तो पहले इधर उधर देखा कि स्टेशन पर कोई स्वास्थ्य सुविधा मिल जाएगी। जब नहीं मिली तो स्टेशन के पास दवा की दुकान से दवा लिया।
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बोले अधिकारी

रेलवे स्टेशन परिसर में यात्रियों के लिए प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जिम्मेदारी रेल प्रशासन की है। उन्हीं को हेल्थ बूथ बनाने सहित अन्य व्यवस्थाएं करनी हैं। - डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ

यात्रियों के लिए सर्कुलेटिंग एरिया में इमरजेंसी मेडिकल रूम बनवाया जाएगा। यहां डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ के साथ ही प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रहेगी। अगर किसी यात्री की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलती है तो स्वास्थ्य कर्मी जाकर उनका उपचार करते हैं। - गौरव दीक्षित, स्टेशन डायरेक्टर, कैंट रेलवे स्टेशन
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