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अमर उजाला शिक्षा अभियान: बच्चों की पढ़ाई के लिए अभिभावकों की भी चलीं कक्षाएं, कोरोना काल ने खोले शिक्षा जगत के कई रास्ते

Sun, 27 Mar 2022 11:54 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

कोरोना संक्रमण काल ने शिक्षा जगत के लिए कई रास्ते खोल दिए हैं। हाइब्रिड मॉडल ने स्कूलों में शिक्षक, अभिभावक और छात्रों की पूरी दिनचर्या ही बदल दी। 
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ऑनलाइन क्लास लेते छात्र - फोटो : ANI
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण काल ने शिक्षा जगत के लिए कई रास्ते खोल दिए हैं। हाइब्रिड मॉडल ने स्कूलों में शिक्षक, अभिभावक और छात्रों की पूरी दिनचर्या ही बदल दी। दो साल तक चली ऑनलाइन पढ़ाई अब बच्चाें की आदत में शुमार हो चुकी है। सरकारी और निजी संस्थानों में वर्चुअल बैठकें हो रही हैं। वहीं, ऑनलाइन शिक्षा का भी तेजी से प्रसार हुआ।

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डिजिटल तकनीक का भरपूर इस्तेमाल शैक्षणिक संस्थानों में किया गया। इसके सकारात्मक परिणाम भी दिखाई दिए।  व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए छात्रों का संपर्क बढ़ा तो यूट्यूब के जरिए बेहतर अध्ययन सामग्री आसानी से मिल रही है। दूरदर्शन, मोहल्ला क्लास और शिक्षा सारथी के जरिए भी बच्चों को सीखने का मौका मिला। अब जब कक्षाएं चलने लगी हैं तब भी डिजिटल तकनीक की मदद से छात्र पढ़ रहे हैं।
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केराकतपुर स्थित वाराणसी पब्लिक स्कूल के प्रबंधक अमित पांडेय ने बताया कि पहली बार लॉकडाउन में 50 फीसदी अभिभावकों ने साथ दिया। जिसके लिए हमने शिक्षा के ऑनलाइन मोड को अपनाया। बच्चों की पढ़ाई जारी रहे, इसके लिए हमने पहले अभिभावकों को प्रशिक्षण देना शुरू किया।
पढ़ेंः  कोरोना संक्रमण काल के बीच शिक्षा की अलख जगाने के लिए शिक्षकों ने की पहल

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अमर उजाला शिक्षा अभियान - फोटो : अमर उजाला
उन्हें घर पर ही बच्चों को किस प्रकार शिक्षा देनी है, इसके बारे में बताया गया। धीरे-धीरे माहौल सुधारने के साथ बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए भी काम शुरू किया। कोरोना काल में ही हमने बच्चों को खेलों के माध्यम से उन्हें जोड़े रखा। इसके लिए विद्यालय के योग शिक्षक रोजाना ऑनलाइन अभ्यास कराते थे। बच्चों और स्कूल की मेहनत का फल है कि स्कूल ने योग के तीन राष्ट्रीय, एक राज्य और एक मंडल स्तरीय टूर्नामेंट कराए। 

शिक्षकों की तरकीब से फेल हुआ कोरोना

कोरोना काल में स्कूली शिक्षा के समक्ष भी चुनौती कम नहीं थी। नौनिहालों के भविष्य को लेकर अभिभावक और शिक्षक दोनों चिंतित हो उठे। ऐसे में आधुनिक तकनीक और शिक्षकों का जज्बा काम आया, खासकर ग्रामीण अंचलों में भी शिक्षकों ने अपनी पहुंच बनाकर बच्चों को शिक्षित किया।


बच्चों तक ई-कंटेंट पहुंचाने के लिए चोलापुर के प्राथमिक विद्यालय छित्तपुर के प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार पांडेय ने घर पर ही अपने शैक्षिक वीडियो बनाने शुरू किए। संक्रमण जैसे ही कम हुआ, अरविंद की पाठशाला कभी किसी द्वार तो कभी मंदिर के परिसर में सजती थी। वह मोबाइल से ब्लूट्रूथ स्पीकर के जरिए बच्चों को ई-कंटेंट दिखाकर विषय को समझाते थे। 
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खुद को कमरे में कर लेती थीं कैद


प्राथमिक विद्यालय मंडुवाडीह की प्रधानाध्यापिका सरिता राय ने भी कोरोना काल में बच्चों तक शिक्षा पहुंचने के लिए कई जतन किए। सरिता बताती हैं कि सभी बच्चों की बुद्धि समान नहीं होती है। कोई सामान्य या औसत तो कोई तेज बुद्धि का होता है। क्लास में अध्यापक की नजर सभी बच्चों पर रहती है। पढ़ने में कमजोर बच्चों पर भी ध्यान बना रहता है।

वहीं, ऑनलाइन व्यवस्था में विद्यार्थी दूर रहते हैं, इसलिए कोरोना काल में ई-कंटेंट तैयार किया, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र विषय को समझ सकें । ऑडियो और वीडियो भेजने के साथ ही व्हाट्सएप व वीडियो कांफ्रेंसिंग से शंकाओं का समाधान किया गया। कंटेंट तैयार करते समय खुद को कमरे में बंद कर लेती थी, ताकि वीडियो में बाहरी आवाज न अपलोड हो।
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