गत बुधवार को हिंदूवादी संगठन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया था। ज्ञानवापी के मां शृंगार गौरी मामले की वादिनी चार महिलाओं ने भी जिलाधिकारी से मिलकर स्थायी शौचालय के निर्माण के निर्णय का विरोध किया था। उनकी मांग थी कि वजू स्थल ज्ञानवापी परिसर से बाहर किया जाए।
गुरुवार को जिला प्रशासन ने आम सहमति से ज्ञानवापी के 100 मीटर दायरे में नमाजियों के लिए मोबाइल शौचालय रखवा दिए हैं। जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने बताया कि आम सहमति से नमाजियों के लिए मोबाइल शौचालय और वजू की व्यवस्था कर दी गई है। पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार की गई है। इसे शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।
ज्ञानवापी मस्जिद में नमाज के लिए उमड़ी भीड़ (फाइल)
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जुमे से शुरू होकर इसी दिन मुकद्दस रमजान अलविदा हो रहा है। कई दशकों बाद ऐसा मौका आया है कि रमजान में पांच जुमा और जुमे पर ही मोमिनों को ईद के चांद के दीदार का मौका मिल सकता है। लोग इसे अच्छा संयोग और अफजल मान रहे हैं। इस साल रमजान 24 मार्च शुक्रवार से शुरू हुआ। इसी दिन से ही मोमिन अल्लाह की इबादत में मशगूल हैं। इस दौरान कुल पांच जुमा पड़े।
मौ. अब्दुल्लाह नासिर ने बताया कि रमजान में पांच जुमा आना मोमिनों के लिए खुशी का पैगाम देने वाला है। उन्हें खुदा के बारगाह में सजदा करने और दुआ मांगने का मौका मिला है। पांचवें जुमे पर ही रमजान की 29 तारीख पर चांद की तस्दीक की जाएगी। यह भी कई दशक बाद देखने को मिल रहा है। कुछ उलेमाओं व लोगों का मानना है कि 40 साल बाद ऐसा अवसर मिला है। वहीं, शकील अहमद जादूगर और शाहिद अली मुन्ना ने कहा कि अपनी जिंदगी में पहली बार ऐसा अवसर देखने में आया है।