ऑल इंडिया कराते चैंपियनशिप
- फोटो : अमर उजाला
जिनकी बेटियां मार्शल आर्ट्स में पारंगत हैं उनके मां-बाप को परेशान होने की जरूरत नहीं। कराते एक ऐसा आत्मरक्षा का खेल है जिससे बेटियां हर परिस्थिति में अपनी सुरक्षा कर सकती हैं। बेटे अगर हनुमान हैं तो बेटियां आज दुर्गा। ये बातें शनिवार को राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने सातवें मामा ऑल इंडिया कराते चैंपियनशिप के समापन पर कहीं।
अकादमी की पांच बेटियों को बीपीएड की शिक्षा निशुल्क
खेल समापन के अवसर पर मंत्री रविंद्र जायसवाल ने प्रतियोगिता में बेटियों की भागीदारी अधिक होने पर खुशी जाहिर करते हुए एकेडमी की पांच बेटियों को धीरेंद्र सिंह महिला महाविद्यालय से बीपीएड की शिक्षा निशुल्क कराने की घोषणा की।
ऑल इंडिया कराते चैंपियनशिप
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वहीं, एसीपी संतोष कुमार सिंह ने मार्शल आर्ट्स का खेल महिला सशक्तीकरण के लिए बहुत जरूरी है। कार्यक्रम में आने के बाद मुझे मेरे पुराने दिन आ गए। मैं भी कभी बीएचयू में अभ्यास करता था। आज जहां (खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए) आप हैं, वहां कभी मैं हुआ करता था। आप लोग भी अच्छा खेलो और इस मंच तक पहुंचो, यही मेरी शुभकामना है।
मानव अकादमी की ओर से सामर्थ्य मैगजीन का लोकार्पण
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इस अवसर मानव अकादमी की ओर से सामर्थ्य मैगजीन का लोकार्पण किया गया। आयोजन सचिव व मानव अकादमी के मुख्य प्रशिक्षक सेंसई किसलय मानव ने बताया कि प्रतियोगिता के दूसरे दिन सीनियर टीम के 92 मुकाबले हुए।
रेफरी काउंसिल के चेयरमैन सेंसई अश्वनी यादव (एशियन जज), अध्यक्ष सेंसई छत्रपाल नामदेव, कोऑर्डिनेटर शशिशेखर शर्मा, शोभनाथ पटेल, के. श्रीनिवास, अजय सिंह जावा, सुनील सिंह, प्रवीण सिंह, विजय पर्चा, शरद कांबली, दिलीप सैनी, कुंजन मौर्या, महेश गुप्ता, मंगल सिंह, सुरजीत सिंह पाल, अनीता सिंह आदि की निगरानी में सभी मुकाबले हुए।