केस- वन
खोजवां निवासी खुशबू ने मुंबई जाने के लिए 10 दिन पहले गो फर्स्ट की टिकट बुक कराई थी। उनका कहना है पहले टिकट की बुकिंग करने पर कम पैसे लगते हैं, लेकिन अचानक से उड़ान निरस्त होने से परेशानी हो रही है। अब एक दो दिन पहले टिकट बुक करने पर ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा।
केस-दो
नदेसर निवासी शिवम ने आठ मई को अहमदाबाद जाने के लिए गो फर्स्ट की फ्लाइट में टिकट बुक कराई थी। उन्हें जरूरी मीटिंग के लिए जाना था। पहले गो फर्स्ट का संदेश आया कि तीन और चार को उड़ानें निरस्त रहेंगी। फिर मैसेज आया कि 9 मई तक निरस्त हो गई हैं। दूसरी फ्लाइट में सीट नहीं मिल रही इससे काफी परेशानी हो रही।
संकट में चल रही एयरलाइन गो फर्स्ट की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब लीजर्स ने भी अपने विमानों का पंजीकरण रद्द करने की अर्जी देनी शुरू कर दी है। अब तक कुल 20 विमान वापस लेने की याचिका डाली गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पट्टादाताओं (लीजर्स) का विवरण और उनके अनुरोध को अपनी वेबसाइट पर पब्लिश किया है। विशेषज्ञों के मानें तो जब भी ऐसी कोई मांग आती है तो DGCA को पांच कार्य दिवसों में विमान का पंजीकरण रद्द करना शुरू करना होता है। उसका विवरण अपनी वेबसाइट पर भी देना होता है। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं है कि गो फर्स्ट इस पर कानूनी चुनौती देने की योजना बना रहा है या नहीं?
दिवाला समाधान याचिका पर फैसला सुरक्षित
इससे पहले राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने संकट में फंसी एयरलाइन गो फर्स्ट की स्वैच्छिक दिवाला समाधान याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। एनसीएलटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रामलिंगम सुधाकर की अगुवाई वाली दो सदस्यीय पीठ ने दिनभर चली सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा। वाडिया समूह के नियंत्रण वाली एयरलाइन ने अपनी याचिका में दिवाला समाधान कार्यवाही शुरू करने की अपील की है। इसके साथ ही एयरलाइन ने अपनी वित्तीय देनदारियों पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग रखी है। हालांकि, पट्टे पर विमान देने वाली कंपनियों ने एयरलाइन के इस आग्रह का विरोध करते हुए कहा कि उनका पक्ष सुने बगैर दिवाला समाधान कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती।