हजरत अली की जयंती पर गुरुवार को मैदागिन टाउन हाल से निकाला गया जुलूस।
दिल्ली के आचार्य प्रमोद कृष्णन ने कहा कि अली जितना तुम्हारे हैं, उतना ही हमारे भी हैं। अली के लिए मजहब की दीवार नहीं होनी चाहिए। अली सिर्फ मुसलमानों या शियाओं के नहीं हैं। हमारे लिए हजरत अली वैसे ही हैं जैसे भगवान राम और कृष्ण। 13 रजब गुरुवार को दरगाहे फातमान में हजरत अली की जयंती पर आयोजित ‘हजरत अली और शख्सियत’ सेमिनार में उन्होंने ये बातें कहीं।
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि ये अच्छा संयोग ही है कि आज हम हजरत अली की पैदाइश का जश्न मना रहे हैं और कल बजरंग बली का जन्मदिन मनाएंगे। लोग कहते हैं कि इस्लाम से खतरा है लेकिन सच्चाई तो ये है कि खतरा उनसे हैं जो असल में मजहब को नहीं जानते, फिर चाहे वे जिस मजहब के हों। ईरान के आका सालेह ने कहा कि विलादत से लेकर शहादत तक हजरत अली की जिंदगी सारी दुनिया के लिए रौशन चिराग है।
इंजीनियर रिजवान वारसी, वली मेहंदी ने भी नूरानी तकरीर पेश की। सदारत मौलाना जमीरुल हसन ने की। शायर मुस्तकीम कुरैशी, तनवीर, रिषी पांडेय ने कलाम पेश किए। एहतेशाम आबदी व मौलाना एजाज गदीरी ने लोगों को इस्तकबाल किया। मुर्तजा शमसी, जहीर हैदर, जाफर एडवोकेट ने शुक्रिया अदा किया। संचालन जीशान आजमी ने किया। संयोजन मुतवल्ली अब्बास रिजवी शफक व अमीन रिजवी का रहा।