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मुगलकाल का बेहतरीन नमूना है गंगा घाट किनारे का आलमगीर मस्जिद, जानिए इसके बारे में

Thu, 04 Oct 2018 05:25 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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पंचगंगा घाट पर आलमगीर मस्जिद का औरंगजेब ने कराया था निर्माण - फोटो : अमर उजाला
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धार्मिक निर्माणों में भी कलात्मकता की नुमाइश न केवल श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है बल्कि एक अद्भुत सुकून भी देती है। यही वजह थी कि प्राचीन भारतीय काल से लेकर मध्यकालीन समय तक किसी भी निर्माण में उसकी मजबूती के अलावा खूबसूरती पर खास ध्यान दिया जाता था।
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समृद्ध संस्कृति, कला और परंपरा को अपने आप में समेटे हुए आज भी प्राचीन इमारतें खड़ी हैं।  ऐसे ही शानदार इमारतों में से है गंगा किनारे स्थित आलमगीर मस्जिद। धार्मिक इमारत होने के बावजूद इस मस्जिद का कलात्मक पक्ष बेजोड़ है। मुगल सल्तनत में गंगा किनारे निर्मित यह मस्जिद उस दौर के उत्कृष्ट कला का एहसास कराती है।

मस्जिद के निर्माण में कलात्मक पक्ष का खास ख्याल रखा गया है। इस मस्जिद को धरहरा मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। मस्जिद की दीवारों पर किए गए फूल पत्तियों के अलंकरण बेहद आकर्षक लगते हैं। इस मस्जिद की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी मीनारें थीं जो अब टूट चुकी हैं।
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एक मीनार 1956 में रख रखाव के अभाव में टूट गई थी तो दूसरी को 1958 में तुड़वा दिया गया। मस्जिद की ऊंची मीनारों को देखकर भारतेंदु हरिश्चंद्र की इन मीनारों पर लिखी लाइनें भी बिलकुल सच लगती हैं। 
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मस्जिद की ये मीनारें बनारस के दो हाथ

पंचगंगा घाट पर आलमगीर मस्जिद - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने लिखा है ‘मस्जिद की ये मीनारें बनारस के दो हाथ, जो ऊपर वाले से दोनों हाथ उठाकर दुआ में कुछ मांग रही हैं’। वहां रहने वाले लोगों की मानें तो मस्जिद जहां बनी है वहां पहले बिंदु माधव का मंदिर था। बिंदु महाराज दक्षिण भारत के महाजन हुआ करते थे। यहां पर उनका धरहरा था। दिल्ली से जब औरंगजेब यहां आए था तब बिंदु महाराज से उसे यहीं ठहराया।

औरंगजेब ने यहीं पर नमाज अदा की। उसे ये जगह इतनी पसंद आई कि इसे बिंदु महाराज से लेकर यहां मस्जिद बनवाया। 1663 में यहां ये मस्जिद बनाई गई और इसका धरहरा नाम रख दिया गया। पंचगंगा घाट पर बड़े से चबूतरे पर निर्मित इस मस्जिद से घाट की पहचान बन गई है। प्रवेश द्वार से भीतर जाने पर सामने भव्य मस्जिद का दीदार होता है।

मस्जिद के बाहर बना छोटा सा तालाब, जिसके बीच में लगा फौव्वारा बेहद खूबसूरत लगता है। मस्जिद के गुंबद के निर्माण में स्थापत्य कला का नायाब नमूना इस्तेमाल किया गया है। मस्जिद के हर हिस्से को उत्कृष्ट बनाने का पूरा प्रयास किया गया है। गंगा किनारे बने घाटों के बीच यह मस्जिद अपनी खास पहचान रखती है। 

 
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