पंचगंगा घाट पर आलमगीर मस्जिद का औरंगजेब ने कराया था निर्माण
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धार्मिक निर्माणों में भी कलात्मकता की नुमाइश न केवल श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है बल्कि एक अद्भुत सुकून भी देती है। यही वजह थी कि प्राचीन भारतीय काल से लेकर मध्यकालीन समय तक किसी भी निर्माण में उसकी मजबूती के अलावा खूबसूरती पर खास ध्यान दिया जाता था।
समृद्ध संस्कृति, कला और परंपरा को अपने आप में समेटे हुए आज भी प्राचीन इमारतें खड़ी हैं। ऐसे ही शानदार इमारतों में से है गंगा किनारे स्थित आलमगीर मस्जिद। धार्मिक इमारत होने के बावजूद इस मस्जिद का कलात्मक पक्ष बेजोड़ है। मुगल सल्तनत में गंगा किनारे निर्मित यह मस्जिद उस दौर के उत्कृष्ट कला का एहसास कराती है।
मस्जिद के निर्माण में कलात्मक पक्ष का खास ख्याल रखा गया है। इस मस्जिद को धरहरा मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। मस्जिद की दीवारों पर किए गए फूल पत्तियों के अलंकरण बेहद आकर्षक लगते हैं। इस मस्जिद की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी मीनारें थीं जो अब टूट चुकी हैं।
एक मीनार 1956 में रख रखाव के अभाव में टूट गई थी तो दूसरी को 1958 में तुड़वा दिया गया। मस्जिद की ऊंची मीनारों को देखकर भारतेंदु हरिश्चंद्र की इन मीनारों पर लिखी लाइनें भी बिलकुल सच लगती हैं।