Akshay Tritiya 2025 : मराठी समाज में चैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया से वैशाख शुक्ल तृतीया यानी अक्षय तृतीया तक एक माह तक चैत्र गौरी पूजन श्रद्धा और उल्लास के साथ होता है। सुहागिन विविध नैवेद्य के साथ विशेषकर हल्दी-कुमकुम पूजा करती हैं।
मराठी समाज की महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा और सुख-समृद्धि के लिए अक्षय तृतीया तक मां गौरी का शृंगार कर पूजा करेंगी। वह नवरात्र के तीसरे दिन से ही रोज अपने घरों में पालने पर मां गौरी को विराजमान कराकर उनका शृंगार करती हैं। मां की हल्दी-कुमकुम आदि नैवेद्य अर्पित कर पूजा करती हैं।
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मराठी समाज में चैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया से वैशाख शुक्ल तृतीया यानी अक्षय तृतीया तक एक माह तक चैत्र गौरी पूजन श्रद्धा और उल्लास के साथ होता है। सुहागिन विविध नैवेद्य के साथ विशेषकर हल्दी-कुमकुम पूजा करती हैं। श्रीकाशी महाराष्ट्र सेवा समिति के ट्रस्टी संतोष सोलापुरकर ने बताया कि महाराष्ट्र में खासकर सुहागिन का यह त्योहार है।
चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन यानी चैत्र शुक्लपक्ष की तृतीया को गौरी की पूजाकर उन्हें झूले में बैठाती हैं और प्रतिदिन उनकी पूजा करती हैं। मां गौरी को दाल, करंजी (गुझिया), चने, बतासे, शरबत, फल आदि नैवेद्य अर्पित कर पूजन अर्चन करते हैं। एक माह तक मां की पूजा करती हैं और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करती हैं।