सारनाथ थाने के बाहर धरना प्रदर्शन
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सारनाथ थाने में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मधु दुबे थानेदार से न्याय की गुहार लगाती रही और फिर रोने लग रही थी। बेटी के वियोग में वह रह-रहकर भावुक हो जा रही थी। उन्होंने थानेदार के टेबल पर दोनों हाथ पटककर अपनी चूड़ियां तोड़ डाली। बार-बार कहती रही कि मुझे हर हाल में न्याय चाहिए। समर सिंह ने मेरी बेटी की जिंदगी ली है और मेरा हंसता खेलता परिवार भी उजाड़ दिया है।
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आरोप लगाया कि उसे पुलिस बचा रही है। पुलिस ने समर सिंह को किस बिल में छुपाकर रखा है। कितने पैसे उसने दिए हैं। लाइव वीडियो में साफ दिख रहा है कि मेरी बेटी की हत्या हुई है। मेरी बेटी को थप्पड़ मारा गया है। क्या कानून की आंखें फूट गई हैं। समर सिंह का क्या बिगाड़ा था मेरी बेटी ने ? आज अगर उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई तो मैं खुद को यहीं खत्म करुंगी।
आकांक्षा की मां ने सवाल पूछा कि यूपी में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं नारा हवा हो गया है। महिला अपराध पर नियंत्रण के दावे कागजी मालूम पड़ने लगे हैं। मैंने समर सिंह और उसके भाई के खिलाफ शोषण, मारपीट, धोखाधड़ी समेत कई आरोप लगाए और तहरीर दी। लेकिन पुलिस ने सिर्फ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया। बाकी धाराएं पुलिस खा गई। बताया कि पिछले साल आकांक्षा ने सारनाथ में जन्मदिन मनाया था। तब भी समर सिंह ने उसे मारापीटा था। इसकी शिकायत आकांक्षा ने सारनाथ चौकी में की थी।
आकांक्षा दुबे-समर सिंह
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तब पुलिस ने समझाकर किसी तरह मामले को शांत करा दिया था। हाल ये रहा कि समर और संजय मेरी बेटी को लगातार प्रताड़ित करते रहे। अब बेटी की मौत के बाद पुलिस मामले को दबाने और आरोपियों को बचाने में लगी है। जनसत्ता पार्टी के जौनपुर जिलाध्यक्ष राजन त्रिपाठी ने कहा कि आकांक्षा ही परिवार का भरण पोषण करती थी।
उसकी मौत से परिवार की जीविका का साधन भी समाप्त हो गया। आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन बड़ा होगा। थाने से बाहर निकले फिल्म डायरेक्टर अमित राय ने कहा कि अब तक हुई पुलिसिया कार्रवाई से संतुष्टि नहीं है। आज अधिकारियों ने 24 घंटे में आरोपियों को गिरफ्तार करने का भरोसा दिया है।