मुकदमा दर्ज होते ही समर सिंह और संजय सिंह भूमिगत हो गए। छह अप्रैल की रात गाजियाबाद में अपने रिश्तेदार के घर ठहरने गए समर सिंह को पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे गाजियाबाद की अदालत में पेश कर पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर सड़क मार्ग से शनिवार की सुबह वाराणसी लेकर आई। लगभग सात घंटे की पूछताछ के बाद पुलिस ने समर सिंह को रिमांड मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। उधर, संजय सिंह की तलाश में सारनाथ थाने की पुलिस और क्राइम ब्रांच की तीन टीमों की दबिश जारी है।
भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत के मामले में नामजद गायक व अभिनेता समर सिंह उर्फ समरजीत सिंह को पुलिस ने जब गुरुवार रात गिरफ्तार किया तो वो फूट-फूट कर रो पड़ा। हाथ जोड़कर वाराणसी कमिश्नरेट की पुलिस के सामने गिड़गिड़ाया। बोला कि मैं बेकसूर हूं, छोड़ दीजिए। मेरा भविष्य चौपट हो जाएगा, लेकिन पुलिस ने सभी मिन्नतों को अनसुना किया।
समर 10 दिन से पुलिस से आंख मिचौली खेल रहा था, लेकिन गुरुवार देर रात वह पुलिस के चंगुल में फंस गया। वह गाजियाबाद में अपने जिस परिचित के फ्लैट में ठहरने के लिए पहुंचा था, वहां कमिश्नरेट की पुलिस को देखकर सन्न रह गया। पुलिस ने गिरफ्तारी की बात कही तो वह रोने लगा। उसने पुलिस से गुहार लगाई और कहा कि आकांक्षा दुबे ने न कोई सुसाइड नोट नहीं लिखा था। ना आत्महत्या से पहले उस पर कोई आरोप लगाया, फिर भला उसे कसूरवार क्यों ठहराया जा रहा है? इसलिए उसे छोड़ दिया जाए।
समर सिंह ने पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि वह बीते 25 और 26 मार्च को गोरखपुर में शूटिंग कर रहा था। गोरखपुर में ही उसे आकांक्षा की आत्महत्या की जानकारी मिली। 26 मार्च की रात वह लखनऊ गया था। 27 मार्च को आकांक्षा की मां मधु दुबे के आरोपों और खुद पर दर्ज मुकदमे की जानकारी उसे मिली तो वह घबरा गया।
एक बार लगा कि वह अपना पक्ष पुलिस के सामने रखे, लेकिन मधु दुबे के आरोपों की वजह से वह हिम्मत नहीं जुटा सका। इसके बाद अपना वाहन लखनऊ में ही छोड़ कर सड़क मार्ग से अपने दोस्त संजय सिंह के साथ गाजियाबाद चला गया। गाजियाबाद के साथ ही दिल्ली, नोएडा और देहरादून में अपने खास करीबियों के यहां ठिकाने बदल-बदल कर रहा।